दीपावली से पहले किसानों को मिले उचित मुआवजा, चक्रवाती तूफान ने तोड़ी अन्नदाताओं की कमर

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सिर्फ सुशासन के दावे और बड़े-बड़े वादे नहीं, किसानों को तत्काल राहत दे विष्णुदेव सरकार — महेन्द्र यादव

दीपावली से पहले किसानों को मिले उचित मुआवजा, चक्रवाती तूफान ने तोड़ी अन्नदाताओं की कमर

राजनांदगांव। जिला पंचायत सदस्य एवं जिला कांग्रेस कमेटी राजनांदगांव (ग्रामीण) के महामंत्री महेन्द्र यादव ने चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ से किसानों की फसलों को हुए नुकसान पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए प्रदेश की विष्णुदेव साय सरकार से तत्काल सर्वे कराकर प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने की मांग की है।

महेन्द्र यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार केवल सुशासन के दावे और बड़े-बड़े वादे करने तक सीमित न रहे, बल्कि संकट की इस घड़ी में किसानों के लिए ठोस कदम उठाए। पहले से ही सरकारी व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं से परेशान किसान अब चक्रवाती तूफान की मार झेल रहे हैं। तूफान ने किसानों की मेहनत, उम्मीदों और आर्थिक स्थिति पर गहरा प्रहार किया है तथा उनकी कमर तोड़कर रख दी है।

उन्होंने कहा कि दीपावली जैसे सबसे बड़े त्योहार में अब कुछ ही दिन शेष हैं, लेकिन फसलों को हुए नुकसान के कारण किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों की पीड़ा को समझे और दीपावली से पहले प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देकर बड़ी राहत प्रदान करे।

महेन्द्र यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार का उल्लेख करते हुए कहा कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जाती थी। दीपावली, तीजा, रक्षाबंधन जैसे त्योहारों के अवसर पर तथा खाद-बीज की आवश्यकता के समय किसानों को आर्थिक संबल देने के लिए समय-समय पर राहत पहुंचाई जाती थी। इससे किसानों में विश्वास और खुशहाली का माहौल रहता था।

उन्होंने कहा कि आज प्रदेश का किसान एक ओर सरकारी व्यवस्थाओं से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर प्राकृतिक आपदा ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ऐसे समय में सरकार को किसानों के प्रति संवेदनशीलता दिखाते हुए केवल घोषणाओं और प्रचार-प्रसार के बजाय धरातल पर राहत पहुंचानी चाहिए।

महेन्द्र यादव ने विष्णुदेव साय सरकार से मांग की है कि चक्रवाती तूफान से हुए फसल नुकसान का तत्काल निष्पक्ष सर्वे कराया जाए, प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाए और दीपावली से पहले आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए। अन्नदाता को संकट में अकेला छोड़ना उचित नहीं है। किसानों को आश्वासन नहीं, बल्कि समय पर राहत और न्याय मिलना चाहिए।

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