राजनांदगांव पुलिस को और अधिक अनुशासित, प्रभावी और पब्लिक फ्रेंडली (जनोन्मुखी) बनाने के लिए पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा ने एक नई पहल की है। जिले के लगभग 300 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए “दक्ष ओरिएंटेशन कार्यक्रम” का आयोजन किया गया। इस दौरान एसपी ने सीधे जवानों से बात की और उनकी समस्याएं सुनीं। बेहतरीन सुझाव देने वाले और सवाल पूछने वाले जवानों को मंच पर बुलाकर तुरंत सम्मानित भी किया गया।
एसपी अंकिता शर्मा ने साफ शब्दों में कहा कि पुलिस की नौकरी चुनौतियों और मानसिक दबाव से भरी है, लेकिन इसका असर आम जनता पर नहीं दिखना चाहिए। उन्होंने पुलिस की कार्यप्रणाली को सुधारने के लिए कड़े निर्देश दिए।
‘गलतियां बर्दाश्त नहीं, सुधरें वरना सीधे लाइन अटैच या सस्पेंड होंगे’
एसपी ने उन सामान्य गलतियों और कमियों को उजागर किया जो अक्सर ड्यूटी के दौरान सामने आती हैं और जिससे पुलिस महकमे की छवि खराब होती है। उन्होंने कड़े लहजे में कहा कि—
“ड्यूटी में छोटी-छोटी लापरवाहियां और नियमों की अनदेखी भारी पड़ सकती है। ऐसे मामलों में अब विभागीय जांच, लाइन अटैचमेंट या निलंबन (सस्पेंशन) जैसी कड़ी कार्रवाई की जाएगी।”
एसपी के 5 बड़े निर्देश
अनुशासन सर्वोपरि: ऑन-ड्यूटी किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी।
पब्लिक से व्यवहार: आम जनता के प्रति व्यवहार सकारात्मक, संवेदनशील और मददगार होना चाहिए।
पारदर्शिता: हर केस और कार्रवाई में पूरी पारदर्शिता और ईमानदारी हो।
नो डिले पॉलिसी: शिकायतों और मामलों पर समयबद्ध (टाइम-बाउंड) कार्रवाई की जाए।
कम्युनिकेशन गैप खत्म हो: बड़े अधिकारी और जवानों के बीच लगातार संवाद बना रहे।
ओपन माइक सेशन: जवानों ने बेझिझक पूछे सवाल, मिले सुझाव
कार्यक्रम के दौरान एक प्रश्नोत्तर और सुझाव सत्र (ओपन माइक) भी रखा गया। इसमें जवानों और थाना प्रभारियों ने बिना किसी संकोच के पुलिसिंग को आधुनिक बनाने, फील्ड की व्यावहारिक दिक्कतों और काम के दबाव को लेकर अपनी बात रखी। जिन पुलिसकर्मियों ने बेहतरीन सुझाव दिए, उन्हें एसपी ने तुरंत पुरस्कृत कर उनका हौसला बढ़ाया। इससे जवानों में भारी उत्साह देखा गया।
ये सीनियर अधिकारी भी रहे मौजूद
इस बड़े ओरिएंटेशन प्रोग्राम में जिले का पूरा पुलिस अमला मौजूद रहा। मुख्य रूप से:
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ASP) कीर्तन राठौर
नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) श्रीमती वैशाली जैन
नगर पुलिस अधीक्षक (CSP) अलिकजेण्डर कीरो
पुलिस अनुविभागीय अधिकारी (SDOP) के पी मरकाम सहित जिले के सभी थाना प्रभारी मौजूद रहे।
जवानों का फीडबैक: “ऐसे कार्यक्रम हर महीने होने चाहिए”
कार्यक्रम के बाद जवानों और मातहत अधिकारियों ने इस पहल की जमकर तारीफ की। उनका कहना था कि आमतौर पर बड़े अधिकारियों से इस तरह खुलकर बात करने का मौका नहीं मिलता। इस संवाद से न सिर्फ मानसिक तनाव कम हुआ है, बल्कि फील्ड में काम करने के लिए नया आत्मविश्वास भी मिला है। जवानों ने मांग की कि भविष्य में भी ऐसे आयोजन लगातार होते रहने चाहिए।

