हाईरिस्क 1884 गर्भवती महिलाओं की हुई नि:शुल्क सोनोग्राफी, मातृ-शिशु मृत्यु दर कम करने पर फोकस

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राजनांदगांव। जिले में गर्भवती माताओं की सुरक्षा और स्वस्थ प्रसव को लेकर स्वास्थ्य विभाग लगातार प्रयास कर रहा है। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत अब तक 1884 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं को चिन्हांकित किया गया है। इनमें से 1717 महिलाओं की पहली और 1325 महिलाओं की दूसरी बार नि:शुल्क सोनोग्राफी कराई जा चुकी है।

मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के उद्देश्य से जिले में हर माह की 9 और 24 तारीख को विशेष स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं की जांच, उपचार और आवश्यक परामर्श दिया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जिन महिलाओं का पहला प्रसव ऑपरेशन से हुआ है, पूर्व में गर्भपात या मृत शिशु का जन्म हुआ है, कम वजन या कम ऊंचाई वाली महिलाएं, कम उम्र में गर्भधारण करने वाली महिलाएं, गंभीर एनीमिया, उच्च रक्तचाप, मधुमेह सहित अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित गर्भवती महिलाओं को हाईरिस्क श्रेणी में रखा गया है।

फोन से ले रहे स्वास्थ्य की जानकारी
कलेक्टर जितेंद्र यादव के निर्देश पर हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार कर स्वास्थ्य विभाग द्वारा नियमित निगरानी की जा रही है। महिलाओं को प्रत्येक सप्ताह फोन के माध्यम से स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और आवश्यक सलाह दी जा रही है। वहीं प्रसव के 15 दिन पहले मितानिनों द्वारा घर-घर पहुंचकर गर्भवती महिलाओं का हाल जाना जा रहा है।

सीएमएचओ डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि इस सप्ताह भी 132 हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं की सोनोग्राफी की गई है। इसमें इंडियन मेडिकल काउंसिल राजनांदगांव शाखा और निजी सोनोग्राफी सेंटरों का विशेष सहयोग मिल रहा है।

उन्होंने जिले की सभी हाईरिस्क गर्भवती महिलाओं से अपील की है कि वे नजदीकी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर चिकित्सक से जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार नि:शुल्क सोनोग्राफी का लाभ लें, ताकि समय रहते जटिलताओं की पहचान कर सुरक्षित प्रसव सुनिश्चित किया जा सके।

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