न्याय नहीं तो आंदोलन होगा : पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल

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राजनांदगांव। जिला मुख्यालय राजनांदगांव में कोतवाली थाना से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें शिकायतकर्ताओं ने पुलिस प्रशासन पर लापरवाही एवं पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया है। पीड़ितों ने इस संबंध में कलेक्टर, जिला पुलिस अधीक्षक, डिस्टि्रक मजिस्ट्रेट, विधिक सेवा प्राधिकरण, एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच एवं त्वरित कार्रवाई की मांग की है।
इससे पूर्व 1 अप्रैल को समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डा. ओमप्रकाश साहू और जिला इकाई राजनांदगांव के साथ पुलिस अधीक्षक को प्रार्थियों के साथ कार्यवाही हेतु ज्ञापन सौंपा गया था, जिस तरह से मामले में कोतवाली थाना द्वारा सुस्ती बरती जा रही है। कार्यवाही सुनिश्चित करने धरना और अनशन करने की चेतावनी प्रशासन को दी जा चुकी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवेदकगण भरत लाल तेली, चंद्रशेखर यादव, अतुल साहू, नारद साहू, अश्विनी सिंह, दुलेश्वर साहू एवं रवि कुमार गोंड द्वारा दिनांक 01 अप्रैल 2026 को कोतवाली थाना में एक लिखित शिकायत प्रस्तुत की गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि उनके साथ धोखाधड़ी कर गलत तरीके से लेन-देन किया गया तथा विरोध करने पर उन्हें धमकाया भी गया। आवेदकों का कहना है कि, शिकायत दर्ज होने के बाद भी पुलिस द्वारा अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। बार-बार थाना जाने के बावजूद केवल आश्वासन ही मिलता रहा। दिनांक 13 अप्रैल 2026 को बयान दर्ज करने के लिए बुलाया गया, किन्तु वहां भी कोई ठोस प्रगति नहीं हुई। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया है कि, दिनांक 19 अप्रैल 2026 को उन्हें जानकारी मिली कि आरोपी का बयान दर्ज कर लिया गया है, जबकि मामले में एक सामाजिक कार्यकर्ता इमानवेल सिंह को अनावश्यक रूप से फंसाने का प्रयास किया जा रहा है। इससे यह संदेह उत्पन्न होता है कि, मामले में निष्पक्षता नहीं बरती जा रही है।
आवेदकों ने अपने ज्ञापन में यह स्पष्ट किया है कि, यदि शीघ्र ही निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करने के लिए बाध्य होंगे।
अतः पीड़ितों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि, मामले की निष्पक्ष जांच किसी अन्य अधिकारी से कराई जाए एवं दोषियों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, ताकि उन्हें न्याय मिल सके। शिकायत के 20 दिन बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने से आक्रोशित पीड़ितों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए न्याय नहीं मिलने पर उग्र आंदोलन की चेतावनी दी है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि, पुलिस निष्पक्ष जांच के बजाय किसी दबाव में कार्य कर रही है। पीड़ितों ने स्पष्ट किया है कि, यदि शीघ्र न्याय नहीं मिला, तो वे राज्य मानवाधिकार आयोग एवं अन्य सक्षम मंचों पर याचिका दायर करेंगे। साथ ही सूचना का अधिकार के तहत पूरे प्रकरण की जानकारी भी मांगी जाएगी। पीड़ितों ने दो टूक कहा है कि, यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे शांत नहीं बैठेंगे। यह लड़ाई अब सड़क से लेकर शासन-प्रशासन के उच्चतम स्तर तक लड़ी जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम ने जिले में पुलिस की कार्यशैली को लेकर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। आमजन भी अब यह जानना चाहता है कि, आखिर न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।

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