राजनांदगांव। शहर सहित जिले में शराब सिगरेट गांजा आदि महंगे होने से अब नशेड़ियों के द्वारा सस्ते विकल्प के तौर पर नशीली दवाइयां सेवन की जाने लगी है। नशीली दवाएं आपराधिक प्रवृत्ति के लोग विशेष तौर से सेवन कर रहे हैं। नशेड़ी युवाओं और किशोरों की संख्या दिनोंदिन तेजी से बढ़ती ही जा रही है। आधिकारिक तौर से भी अनुमान यह लगाया जा रहा है कि दूसरे राज्यों से यहां लाकर नशीली दवाइयां खपाने वाला कोई बड़ा गिरोह सक्रिय है।
इस संबंध में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के सहायक नियंत्रक संजय झाड़ेकर ने बताया कि शहर सहित जिले में 487 मेडिकल स्टोर्स हैं, उनमें 10 दुकान धनवंतरी और जन औषधि केंद्र के नाम से सस्ती दवा की दुकानें भी हैं। सभी को नींद की अथवा नशीली दवाइयां बिना चिकित्सक की पर्ची के नहीं देने की हिदायत दी गई है। विशेष करके बच्चों को बिना डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन के कोई भी दवा सीधे तौर पर नहीं देने कहा गया है। उन्होंने बताया कि हर मेडिकल स्टोर संचालक को अपना फार्मासिस्ट रखने और लेनदेन का रिकॉर्ड रखने तथा मियाद खत्म हो चुकी दवाइयां नियमित रूप से छंटनी करके अलग रखने कहा गया है। हर 6 से 7 माह में प्रत्येक मेडिकल स्टोर्स का इंस्पेक्शन हो रहा है। इससे ऐसा नहीं लगता कि किसी मेडिकल स्टोर से नशीली दवाएं बिना डॉक्टर की पर्ची के बेची जा रही हैं। इस बात की पूरी संभावना है कि अन्य राज्य से नशीली दवाइयां लाकर यहां खपाने वाला चैनल चल रहा है। कुछ ऐसे मामले पुलिस द्वारा आपराधिक रोकथाम के दौरान पूर्व में आ चुके हैं।
जानकारी के अनुसार नशीली दवाइयां तस्करी करने अवैध रूप से बेचने के कुछ मामले न्यायालय में भी चल रहे हैं। जिला न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हाजी हलीम बख्श गाजी ने बताया कि यहां नशीली दवाओं का सेवन विशेष रूप से क्रिमनल लोग कर रहे हैं। कुछ लंबी दूरी के माल वाहक चलाने वाले भी कर रहे हैं। ऐसी दवाएं मेडिकल स्टोर्स में भी चोरी छुपे बिक रही हैं। उन्होंने बताया कि हाल ही में तुमड़ीबोड़ में मेडिकल स्टोर में चोरी छिपे नशीली दवा बेचने का मामला सामने आया था। नागपुर, दुर्ग, भिलाई, रायपुर आदि से भी नशीली दवाएं तस्करी करके यहां लाई और बेची जा रही हैं। उन्होंने बताया कि इस तरह के तीन मामले मेरे पास आए हैं।

