कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव की दूरदर्शी पहल रंग लाई; जिले के 10 प्रमुख उद्योगों ने अपनाई सौर ऊर्जाउद्योगों में 53.03 मेगावॉट से अधिक क्षमता के सोलर प्लांट स्थापितपर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में राजनांदगांव बना मिसाल

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राजनांदगांव, 07 अक्टूबर 2026
कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव की प्रेरणादायी पहल और कुशल मार्गदर्शन से राजनांदगांव जिला सौर ऊर्जा के उपयोग और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में एक नए मील के पत्थर स्थापित कर रहा है। जिले के औद्योगिक संस्थान पारंपरिक बिजली पर अपनी निर्भरता कम कर स्वच्छ एवं टिकाऊ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कलेक्टर श्री यादव के विजन के अनुरूप जिले के प्रमुख औद्योगिक संस्थानों ने अपने परिसरों में लगभग 53.03 मेगावॉट क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित कर एक अनुकरणीय पहल की है
बड़ी औद्योगिक इकाइयों की सहभागिता
कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव के प्रयासों से प्रेरित होकर जिले के विभिन्न बड़े उद्योगों ने सौर ऊर्जा को प्राथमिकता दी है। इनमें प्रमुख रूप से डोंगरगांव पेपर मिल में 11 मेगावॉट
हीरा स्टील खैरझीटी में 17 मेगावॉट, एबीस एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड (बड़भूम डोंगरगांव) में 15 मेगावॉट
राजाराम मेज प्रोडक्ट में 8 मेगावॉट, सिम्प्लेक्स इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड में 660 किलोवॉट ,धनलक्ष्मी पेपर मिल डोंगरगांव में 650 किलोवॉट , क्रेस्ट स्टील एण्ड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड में 300 किलोवॉट
बरार इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में 150 किलोवॉट, श्रीराम सीमलेश प्राइवेट लिमिटेड में 125 किलोवॉट, यूनीफैब्स स्लीपर प्राइवेट लिमिटेड (डोंगरगढ़) में 145 किलोवॉट
इस प्रकार इन प्रमुख संस्थानों में कुल मिलाकर 53.03 मेगावॉट से अधिक क्षमता के सोलर प्लांट स्थापित हो चुके हैं।
कलेक्टर श्री यादव का मानना है कि औद्योगिक विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों का संतुलन ही सतत विकास की कुंजी है। सौर ऊर्जा के उपयोग से दिन के समय ग्रिड पर दबाव कम होता है, जिससे उद्योगों को बिजली खर्च में उल्लेखनीय राहत मिल रही है। इसके साथ ही, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आ रही है और जिले में हरित ऊर्जा का दायरा तेजी से फैल रहा है।
कलेक्टर श्री जितेंद्र यादव ने जिले के शेष औद्योगिक संस्थानों से भी यह अपील की है कि वे अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और परिसर की उपलब्धता के अनुसार सोलर पैनल व प्लांट स्थापित करें। प्रशासनिक स्तर पर मिल रहे इस प्रोत्साहन से राजनांदगांव न केवल ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन रहा है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में पूरे छत्तीसगढ़ राज्य के लिए एक प्रेरणास्त्रोत के रूप में उभर रहा है।

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