रायपुर. राज्य निर्माण के 26 बरस पूरे होने के पूर्व बधाई का सिलसिला चल पडा़ है. राष्ट्रीय क्षत्रिय करणी सेना के प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह तोमर ने प्रदेशवासियों को अपनी बधाई प्रेषित की है.
अपने बधाई सँदेश में तोमर ने कहा है कि नक्सलवाद के खत्म होने से सँभवतः अब छत्तीसगढ़ पहले से ज्यादा गति से प्रगति पथ पर दौड़ेगा. छत्तीसगढ़ बनने के बाद के शुरुआती वर्षों में नक्सली समस्या राज्य में व्यापक तौर पर थी.
हाल के एक दो बरसों के भीतर नक्सलवाद पर तकरीबन काबू पा लिया गया है. राज्य और केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाले सुरक्षा बलों की सफलता बताते हुए तोमर ने कहा है कि अब बस्तर से कवर्धा तक, राजनाँदगाँव से सरगुजा तक हर तरह का विकास पहुँचे ऐसी उम्मीद की है.
अभी कहाँ है…
समग्र विकास सूचकांक (जिसमें आर्थिक, बुनियादी ढांचा, सामाजिक और शासन आदि सभी शामिल हैं) के अनुसार, छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों में 11वें स्थान (स्कोर: 40.9) पर आता है. यह ओडिशा, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों के समान प्रदर्शन स्तर (Lower-Middle Tier) को दर्शाता है.
. बिजली में रैंकिंग स्थिति :
छत्तीसगढ़ भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल है जो बिजली में सरप्लस हैं. छत्तीसगढ़ के लगभग 98.5% घरों में बिजली की पहुंच है, जो राष्ट्रीय औसत से काफी बेहतर है. राज्य अपनी मजबूत वित्तीय स्थिति के साथ देश के अन्य बिजली सँकट वाले राज्यों को भी बिजली की आपूर्ति करता है.
. पानी और जल संरक्षण में रैंकिंग स्थिति :
राष्ट्रीय स्तर पर दूसरा स्थान छत्तीसगढ़ का है. राजधानी रायपुर के नगर निगम को देश में पहला स्थान मिला है. आँकड़ों के अनुसार राज्य में 95.6% से अधिक घरों में पीने के साफ पानी की पहुँच हो चुकी है.
. स्वास्थ्य में रैंकिंग स्थिति :
नीति आयोग के हेल्थ इंडेक्स में छत्तीसगढ़ बड़े राज्यों की सूची में 10वें स्थान के साथ मध्यम दर्जे का प्रदर्शन करने वाला राज्य है. राज्य ने बच्चों के पूर्ण टीकाकरण (79.7%) और पोषण स्तर में राष्ट्रीय औसत से बेहतर सुधार किया है, लेकिन मातृ मृत्यु दर और ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं.
. शिक्षा में रैंकिंग स्थिति :
नीति आयोग के स्कूल शिक्षा गुणवत्ता सूचकांक में छत्तीसगढ़ 13वें स्थान पर आता है. बुनियादी स्कूली बुनियादी ढांचे के मामले में राज्य तेजी से सुधरा है, लेकिन छात्र-शिक्षक अनुपात और ड्रॉप – आउट जैसी समस्याओं के कारण शिक्षा गुणवत्ता विकास सूचकांक में यह राष्ट्रीय स्तर पर पिछले आधे हिस्से (निचले-मध्यम स्तर) में आता है.





