राहुल गांधी को नेहरू से सीखना चाहिए : अशोक चौधरी

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➡️ ब्रिक्स की सफलता पर बेवजह विवाद का आरोप

राजनांदगांव।

ब्रिक्स सम्मेलन के सफल आयोजन और भारत की मेजबानी की देश-दुनिया में हो रही सराहना के बीच विदेशी मेहमानों को मांसाहारी भोजन नहीं परोसे जाने को लेकर कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा सवाल उठाए जाने पर भाजपा किसान नेता अशोक चौधरी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने राहुल गांधी के बयान को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब विपक्ष को ब्रिक्स सम्मेलन की सफलता में कोई कमी नजर नहीं आई, तो अब खान-पान को लेकर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।
श्री चौधरी ने कहा कि भारत की अपनी समृद्ध संस्कृति, परंपरा और खान-पान की विविधता है। विदेशी मेहमानों का स्वागत भारतीय परंपरा और शाकाहारी व्यंजनों से किया जाना किसी कमी का विषय नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की पहचान है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी शाकाहारी परिवार और समाज से आते हैं और उन्होंने भारतीय व्यंजनों के माध्यम से विदेशी मेहमानों का स्वागत कर देश की संस्कृति और आतिथ्य परंपरा को दुनिया के सामने प्रस्तुत किया है। श्री चौधरी ने इस संदर्भ में देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी सुनाया। उन्होंने बताया कि देश की आजादी के बाद, मध्यप्रदेश के गठन से पहले के दौर में तत्कालीन मुख्यमंत्री मिश्रीलाल गंगवाल के कार्यकाल से जुड़ा यह प्रसंग है। श्री चौधरी के अनुसार पंडित नेहरू के कुछ खास विदेशी मेहमान भारत आए थे। उन्होंने मुख्यमंत्री गंगवाल को उनके स्वागत-सत्कार और भोजन की विशेष व्यवस्था करने के निर्देश दिए थे। श्री चौधरी ने बताया कि मिश्रीलाल गंगवाल स्वयं शाकाहारी समाज और परिवार से आते थे। उन्होंने अपने सिद्धांतों से समझौता करने के बजाय पंडित नेहरू को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की और कहा कि वे अपने पद से इस्तीफा देना स्वीकार कर सकते हैं लेकिन अपने व्यक्तिगत और सामाजिक सिद्धांतों के विपरीत जाकर मांसाहारी भोजन परोसने की व्यवस्था नहीं कर सकते। श्री चौधरी के मुताबिक मुख्यमंत्री गंगवाल की यह स्पष्टवादिता और सिद्धांतों के प्रति निष्ठा देखकर पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपने निर्देश को वापस ले लिया और उन्हें अपने सिद्धांतों के अनुरूप कार्य करने की स्वतंत्रता दी। उन्होंने कहा कि यह प्रसंग बताता है कि उस समय राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर व्यक्तिगत आस्था, परंपरा और सिद्धांतों का सम्मान किया जाता था। श्री चौधरी ने कहा कि आज राहुल गांधी को भी अपने नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऐसे प्रसंगों से सीख लेनी चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की खान-पान की पसंद को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना उचित नहीं है। भारत की मेहमाननवाजी का मूल्यांकन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि मेहमानों की थाली में मांसाहारी भोजन था या नहीं। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन भारत के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय आयोजन था और इसके सफल समापन से देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष के कई नेताओं द्वारा भी सम्मेलन की सफलता को स्वीकार किया जा रहा है। ऐसे में राहुल गांधी द्वारा मांसाहार को लेकर सवाल उठाना उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। श्री चौधरी न कहा कि खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे वाली कहावत राहुल गांधी के मौजूदा बयान पर बिल्कुल सटीक बैठती है। जब ब्रिक्स सम्मेलन के आयोजन और उसकी सफलता में कोई बड़ी खामी नहीं मिल रही है, तो अब भोजन में क्या परोसा गया, इसे लेकर विवाद खड़ा किया जा रहा है। श्री चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मेहमानों को भारतीय संस्कृति और पारंपरिक शाकाहारी व्यंजनों से परिचित कराकर भारत की आतिथ्य परंपरा का सम्मान किया है। उन्होंने कहा कि भारतीय भोजन की दुनिया में अपनी अलग पहचान है और देश के प्रधानमंत्री द्वारा भारतीय व्यंजनों के माध्यम से मेहमानों का स्वागत किया जाना गर्व का विषय है। उन्होंने राहुल गांधी से अपने बयान पर पुनर्विचार करने और देश की संस्कृति एवं परंपराओं का सम्मान करने की अपील करते हुए कहा कि उन्हें अपने नाना पंडित जवाहरलाल नेहरू से सीख लेते हुए अनावश्यक विवाद खड़ा करने से बचना चाहिए। श्री चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी को अपने बयान के लिए देश की जनता से माफी मांगनी चाहिए। अंत में अशोक चौधरी ने कहा कि भारत की जनता को भी विपक्ष के ऐसे बयानों को गंभीरता से लेना चाहिए और देश की संस्कृति, परंपरा तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा को लेकर की जा रही अनावश्यक बयानबाजी की निंदा करनी चाहिए।

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