पेट्रोल-डीजल कंपनियों को लाभ देने एक्साइज ड्यूटी कम की भाजपा सरकार ने : शाहिद भाई

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राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एवं राजनांदगांव लोकसभा के प्रभारी शाहिद भाई ने पेट्रोल डीजल पर एक्साइज ड्यूटी कम करने के भाजपाई नौटंकी को आम जनता के साथ छल करार देते हुए कहा कि एक्साइज ड्यूटी कम करने से आम जनता को किसी प्रकार का कोई राहत नहीं है सिर्फ अपने पूंजीपति मित्रों और ऑयल कंपनियों को लाभ देने के लिए यह निर्णय लिया गया है।
शाहिद भाई ने बताया कि केंद्र में जब मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार थी तब डीजल पर 3.56 पैसे प्रति लीटर और पेट्रोल पर 9.48 पैसे प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी थी जो 12 वर्षीय भाजपा सरकार में 31.83 रु डीजल में एवं 32.98 रु प्रति लीटर पेट्रोल में एक्साइज और 12 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर प्रतिदिन 1000 करोड रुपए की कमाई केंद्र सरकार और ऑयल कंपनियां करती रही है।वर्ष 2014 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए सरकार थी तब कच्चे तेल की कीमत 106.94 डॉलर प्रति बैरल थी तब पेट्रोल 71 रु में और डीजल 60 रु में आम जनता को मिलती थी पश्चिम एशिया में युद्ध से पहले कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल थी तब आम जनता को 100 रु प्रति लीटर में पेट्रोल मिल रहा था जो 60 रु में मिलना था उसे जनता ₹100 में खरीदने विवश थी और उसके बाद युद्ध के नाम पर आम जनता को धोखा देते हुए एक्साइज ड्यूटी कम करने की नौटंकी भाजपा सरकार कर रही है यदि सरकार किसी वस्तु की दर या टैक्स कम करती करती है तो उसका सीधा लाभ आम जनता को मिलना चाहिए यदि केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी कम की है तो वर्तमान में पेट्रोल डीजल के दाम कम होने चाहिए लेकिन पेट्रोल डीजल के दाम कम होने के बजाय यथावत है और आम जनता की चिंता पेट्रोल डीजल और गैस कि किल्लत को लेकर बन रही है नायरा पेट्रोल कंपनी ने 5 रु पेट्रोल में बढ़ाया है उसी प्रकार पेट्रोल का घाटा से कंपनी को उबारने के लिए एक्साइज ड्यूटी कम करने का निर्णय लिया है जिसका आम जनता से कोई लेना देना नहीं है। जबकि 2025 में केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी के रूप में 2.71 लाख करोड़ की कमाई की है।2023 से केंद्रीय मंत्री गडकरी 15 रु में पेट्रोल देने का हवाला देकर पेट्रोल में 20% एथनाल मिलाने का निर्णय लिया है उसके बाद हम एथनाल मिले पेट्रोल का उपयोग कर रहे हैं उस हिसाब से भी 20%पेट्रोल के दाम कम नहीं हुए हैं और हम मंहगाई की मार झेल रहे हैं आम जनता की परेशानी से केंद्र सरकार को कोई सरोकार नहीं है जो सरकार की अदूरदर्शिता का परिचायक है ।

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