➡️ बच्चों ने खुद बनाए दीपक, दीपोत्सव मनाकर दिया स्वदेशी और पर्यावरण संरक्षण का संदेश
राजनांदगांव।
दीपावली का पर्व खुशियों, उमंग, उत्साह और प्रकाश का प्रतीक है। इसी उल्लास और सांस्कृतिक परंपरा को आत्मसात करते हुए दीपावली अवकाश के पूर्व शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला खपरीकला में हर्षोल्लास के साथ दीपोत्सव का आयोजन किया गया। इस अवसर पर विद्यालय का वातावरण दीपों की रोशनी, बच्चों की मुस्कान और उत्साह से सराबोर नजर आया। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा का परिचय देते हुए स्वयं मिट्टी के सुंदर एवं आकर्षक दीपक तैयार किए और उन्हें प्रज्वलित कर पूरे विद्यालय परिसर को रोशनी से जगमगा दिया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से मिट्टी के दीपक बनाने, उन्हें आकर्षक रूप देने और सजाने की गतिविधियों में भाग लिया। इसके बाद सभी ने अपने हाथों से तैयार किए गए दीपकों को प्रज्वलित किया। मिट्टी के दीपों से रोशन विद्यालय परिसर ने दीपावली की खुशियों और भारतीय संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की। इस अवसर पर विद्यार्थियों को दीपावली के धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक महत्व से अवगत कराया गया। उन्हें बताया गया कि दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अंधकार पर प्रकाश, अज्ञान पर ज्ञान और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक भी है। यह पर्व हमें आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भावना और सकारात्मक सोच के साथ जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। गतिविधि प्रभारी लक्ष्मी कांत शर्मा ने विद्यार्थियों को स्वयं मिट्टी के दीपक बनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की गतिविधियां बच्चों की छिपी हुई रचनात्मक प्रतिभा को निखारने के साथ ही उन्हें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को मिट्टी के पारंपरिक दीपों का अधिक से अधिक उपयोग करने, स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने तथा पर्यावरण के अनुकूल त्योहार मनाने का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि मिट्टी के दीपक बनाना केवल एक रचनात्मक गतिविधि नहीं, बल्कि यह कुम्हारों के पारंपरिक हुनर और स्थानीय कारीगरों के श्रम के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी अवसर है। स्वदेशी वस्तुओं को अपनाकर हम स्थानीय कारीगरों और उनकी आजीविका को प्रोत्साहन दे सकते हैं। साथ ही पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं। विद्यालय में आयोजित इस अनूठे दीपोत्सव ने विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ व्यवहारिक एवं सांस्कृतिक शिक्षा का भी अनुभव कराया। बच्चों ने स्वयं अपने हाथों से दीपक बनाकर श्रम का महत्व, आत्मनिर्भरता, रचनात्मकता और सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया। दीपावली अवकाश पर जाने से पूर्व आयोजित इस कार्यक्रम ने बच्चों के चेहरों पर खुशियां बिखेर दीं। दीपों की जगमगाहट के बीच विद्यार्थियों ने उत्साह, उमंग और सकारात्मकता के साथ दीपावली पर्व मनाया। विद्यालय का यह आयोजन बच्चों के लिए यादगार अनुभव बन गया और इसके माध्यम से भारतीय संस्कृति, स्वदेशी परंपरा तथा पर्यावरण संरक्षण का सुंदर संदेश भी प्रसारित हुआ।






