एससी, एसटी एवं ओबीसी तीनों समुदाय के लोग संवैधानिक मांगों को लेकर हुए एकजुट

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राजनांदगांव। संवैधानिक अधिकारों, सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था की रक्षा की मांग को लेकर शहर में आरक्षण बचाओ रैली 2.0 का आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ के जेन-जी युवा वर्ग के आह्वान पर आयोजित रैली में राजनांदगांव, मोहला-मानपुर, खैरागढ़ सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। आयोजकों के अनुसार रैली में लगभग पांच हजार लोगों ने भाग लिया। इस दौरान अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण, शिक्षा, रोजगार तथा सामाजिक प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम 21 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपकर एक माह के भीतर कार्रवाई की जानकारी देने की मांग की।

रैली में शामिल प्रतिनिधियों ने कहा कि संविधान ने सभी नागरिकों को समानता, न्याय और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार दिया है। एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक तथा आर्थिक उत्थान के लिए बनाए गए संवैधानिक प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन जरूरी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आरक्षण, बैकलॉग पदों पर भर्ती, पदोन्नति में आरक्षण, छात्रवृत्ति और शासकीय सेवाओं में प्रतिनिधित्व से जुड़े कई मुद्दे लंबे समय से लंबित हैं।

रैली के दौरान प्रतिनिधिमंडल विधानसभा अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री डा. रमन सिंह के बंगले पर पहुंचा और संवैधानिक अधिकारों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल इमाम चौक पहुंचा, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, छत्तीसगढ़ के राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर आवश्यक संवैधानिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई की मांग की गई।

ज्ञापन में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए पदोन्नति में आरक्षण संबंधी नियम-5 को पुनः अधिसूचित कर लागू करने की मांग की गई। साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के संबंधित अंतरिम आदेशों के अनुरूप कार्रवाई करने और बिना आरक्षण रोस्टर के की जा रही पदोन्नतियों पर रोक लगाने का आग्रह किया गया।

प्रतिनिधियों ने छत्तीसगढ़ लोक सेवा आरक्षण अधिनियम 1994 का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने, आरक्षण रोस्टर का नियमित संधारण करने और एससी, एसटी तथा ओबीसी वर्ग के लंबित बैकलॉग पदों को विशेष भर्ती अभियान चलाकर भरने की मांग उठाई। इसके अलावा ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत और एससी वर्ग को 13 प्रतिशत आरक्षण देने से संबंधित लंबित विषयों पर निर्णय लेने की मांग भी की गई।

रैली में प्लेसमेंट, आउटसोर्सिंग और संविदा भर्ती प्रक्रियाओं के कारण आरक्षण व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका जताई गई। प्रतिनिधियों ने कर्मशाला सहायकों की भर्ती में आरक्षण नियमों का पालन करने, स्वामी आत्मानंद विद्यालयों में पदों की गणना की व्यवस्था की समीक्षा करने तथा संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितीकरण से पहले सामाजिक प्रतिनिधित्व का आकलन करने की मांग की।

ज्ञापन में अनुसूचित जाति उपयोजना और जनजातीय उपयोजना की राशि का पारदर्शी उपयोग सुनिश्चित करने, युवाओं के स्वरोजगार एवं कौशल विकास के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने तथा संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत मिलने वाली राशि का जनजातीय विकास में उपयोग करने का मुद्दा भी शामिल रहा।

प्रतिनिधिमंडल ने विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति राशि बढ़ाने और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की। विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों में सामाजिक न्याय से संबंधित सुरक्षा तंत्र स्थापित करने, आरक्षण और बैकलॉग पदों का वार्षिक प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत करने तथा जाति प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया सरल करने पर भी जोर दिया गया।

पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त बनाने, पेसा और वन अधिकार अधिनियम का प्रभावी क्रियान्वयन करने तथा शासन-प्रशासन, आयोगों, बोर्डों और नीति निर्माण संस्थाओं में एससी, एसटी एवं ओबीसी वर्गों को उचित प्रतिनिधित्व देने की मांग भी रखी गई।

इसके अलावा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 165(6) से संबंधित 17 अगस्त 2016 के परिपत्र की समीक्षा कर अनुसूचित जनजाति की जमीन गैर-जनजातीय व्यक्तियों को लीज या किराये पर देने से संबंधित आदेश निरस्त करने की मांग की गई। उच्च न्यायपालिका में सामाजिक प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए संवैधानिक एवं नीतिगत विमर्श शुरू करने का आग्रह भी किया गया।

रैली में महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, सांकरा, दुर्ग में प्राध्यापक पदों की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में आरक्षण रोस्टर निर्धारण का मुद्दा भी उठाया गया। प्रतिनिधियों ने विभाग को इकाई मानकर आरक्षण की गणना किए जाने पर सवाल उठाते हुए भर्ती प्रक्रिया की लागू केंद्रीय कानूनों और नियमों के अनुसार समीक्षा करने की मांग की। उन्होंने आरक्षण की गणना के लिए विश्वविद्यालय को इकाई मानने का आग्रह किया।

इसके साथ ही प्रदेश की निजी औद्योगिक इकाइयों में स्थानीय छत्तीसगढ़ी युवाओं, विशेषकर एससी, एसटी और ओबीसी वर्ग के लोगों को रोजगार के उचित अवसर एवं प्रतिनिधित्व देने की मांग की गई।

रैली के आयोजकों ने शासन से सभी 21 मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लेने और एक माह के भीतर की गई कार्रवाई की जानकारी उपलब्ध कराने की मांग की।

प्रतिनिधियों ने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ नहीं, बल्कि संविधान, सामाजिक न्याय और समान अवसर के अधिकारों की रक्षा के लिए है। उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में मांगों पर संतोषजनक कार्रवाई नहीं होने पर संवैधानिक और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को प्रदेश के अन्य क्षेत्रों में भी आगे बढ़ाया जाएगा।

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