राजनांदगांव। ग्रामीण आबादी क्षेत्रों में निवासरत परिवारों को उनकी संपत्ति का विधिवत कानूनी अधिकार प्रदान करने की दिशा में ‘स्वामित्व योजना’ राजनांदगांव जिले में तेजी से आगे बढ़ रही है। कलेक्टर जितेन्द्र यादव के मार्गदर्शन में योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से अधिकार अभिलेख तैयार करने और अंतिम प्रकाशन के कार्य में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। जिले के कुल 643 ग्रामों में से अब तक 495 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण किया जा चुका है, जिसके तहत 54 हजार 673 अधिकार अभिलेख (प्रॉपर्टी कार्ड) तैयार किए गए हैं।
एक वर्ष में दर्ज की उल्लेखनीय प्रगति
स्वामित्व योजना की प्रगति पर नजर डालें तो जिले में बीते एक वर्ष के दौरान कार्यों में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। 1 अक्टूबर 2025 की स्थिति में जिले के केवल 13 ग्रामों का अंतिम प्रकाशन पूर्ण हुआ था। वहीं प्रशासनिक तत्परता से वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 495 हो गई है। यानी मात्र एक वर्ष की अवधि में 482 अतिरिक्त ग्रामों में अंतिम प्रकाशन का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया है।
संपत्ति के स्वामित्व को मिल रहा दस्तावेजी आधार
स्वामित्व योजना ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति संबंधी अभिलेखों को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल साबित हो रही है। योजना के माध्यम से:
कानूनी मान्यता: ग्रामीण आबादी क्षेत्र में निर्मित मकानों व परिसंपत्तियों का सटीक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार हो रहा है, जिससे ग्रामीणों को स्वामित्व का पुख्ता दस्तावेजी आधार मिल रहा है।
विवादों से मुक्ति: संपत्ति के दस्तावेज प्रमाणित और व्यवस्थित होने से आपसी विवादों में कमी आ रही है।
वित्तीय सुविधा: अधिकार अभिलेख मिलने से ग्रामीणों को अपनी संपत्ति पर बैंक लोन लेने और अन्य वित्तीय कार्य संपादित करने में सुलभता होगी।
जिला प्रशासन द्वारा स्वामित्व योजना के शेष बचे ग्रामों में भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत तेजी से कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है, ताकि शत-प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का हक प्रदान किया जा सके।


