स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता भाजपा सरकार का दोहरा चरित्र ,अधिनियम में गुपचुप संशोधन बहुमत का दुरुपयोग – रूपेश दुबे*

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छ ग प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता रूपेश दुबे ने भाजपा सरकार के विद्युत अधिनियम में बहुमत का दुरुपयोग कर स्मार्ट मीटर लगाए जाने के संशोधन निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर सिर्फ जनता को लूटने का यंत्र है। छ ग में कांग्रेस के आंदोलन के बीच मुख्यमंत्री साय जी ने स्मार्ट मीटर को अनिवार्य नहीं बताया जिसका प्रचार प्रसार उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किया उसके बाद अब अनिवार्य रूप से लगाने का निर्देश भाजपा सरकार का दोहरा चरित्र ही है।

प्रवक्ता दुबे ने कहा है कि स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता का निर्देश जारी कर संसद में केंद्र की भाजपा सरकार ने स्पष्टीकरण दिया था कि स्मार्ट मीटर लगाना या नहीं लगाना यह तय करना उपभोक्ता का अधिकार है। विद्युत अधिनियम 2003 और सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी अथॉरिटी (CEA) के नियमों के तहत उपभोक्ता की सहमति और विकल्प का अधिकार था लेकिन केंद्र सरकार ने गुपचुप तरीके से धारा 177(2)(सी) जो मीटर लगाने व संचालन नियम बनाने के साथ धारा 55(1) रेगुलेशन4(1)(b) में संशोधन कर जहाँ संचार नेटवर्क है वहां स्मार्ट मीटर लगाने का निर्णय लेकर 12 अगस्त 2026 को केंद्र सरकार ने स्मार्टमीटर तेजी से लगाने का निर्देश जारी किया जो अब छ ग में भी 11 सितंबर से लागू किया है जो जनता के संवैधानिक अधिकारों का हनन है।
नेटवर्क माध्यम को आधार बनाकर जनता को लूटने का काम भाजपा सरकार कर रही है जो सीधे तौर पर निजी उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने का काम है छ ग में स्मार्ट मीटर और पुराने मीटर में बिजली बिल की राशि में भयानक अंतर प्रमाणित भी हुआ है। ऐसी दशा में स्मार्ट मीटर की अनिवार्यता सरकार का तुगलकी निर्णय का प्रमाण है।

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