राजनांदगांव। राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत जिले को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी पहल की है। अभियान के प्रथम चरण में 5 ग्रामों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है। इन गांवों में गहन जन-जागरूकता, घर-घर सर्वे और संदिग्ध मरीजों की त्वरित जांच व इलाज की विशेष मुहिम चलाई जाएगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नेतराम नवरतन ने बताया कि चयनित पायलट ग्रामों में छुरिया विकासखंड का ग्राम मासुल, राजनांदगांव (घुमका) के ग्राम खैरझिटी एवं बुंदेलीकला, डोंगरगांव का ग्राम करमतरा और डोंगरगढ़ विकासखंड का ग्राम मुसराकला शामिल हैं। इन गांवों में ‘माय भारत वालंटियर्स’ और ‘एनसीसी कैडेट्स’ के सहयोग से नुक्कड़ नाटक, वॉल पेंटिंग, घर-घर सर्वे और ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक किया जाएगा।
25 वालंटियर्स और 25 एनसीसी कैडेट्स को 5 दिवसीय प्रशिक्षण
जिला क्षय अधिकारी डॉ. अल्पना लुनिया ने बताया कि इस अभियान के लिए 25 माय भारत वालंटियर्स और 25 एनसीसी कैडेट्स का चयन किया गया है। इन्हें जिला अस्पताल, सीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिर में संचालित गतिविधियों का 5 दिवसीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है। ये वालंटियर्स स्थानीय मितानिनों के साथ समन्वय बनाकर ग्रामीणों को टीबी के लक्षणों की पहचान, बलगम जांच और समय पर इलाज शुरू कराने में सहयोग करेंगे।
हैंड हेल्ड मशीन से होगा एक्स-रे, ‘नॉट’ मशीन से जांच
जिला कार्यक्रम प्रबंधक संदीप ताम्रकार ने बताया कि घुमका क्षेत्र में 25 दिसंबर 2026 तक पोर्टेबल ‘हैंड हेल्ड मशीन’ के जरिए ग्रामीणों का एक्स-रे किया जाएगा। एक्स-रे में टीबी के लक्षण या संदेह पाए जाने पर तुरंत ‘नॉट (CBNAAT) मशीन’ से जांच कराई जाएगी। रिपोर्ट पॉजिटिव आते ही मरीज का नि:शुल्क इलाज शुरू कर दिया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग जिले को पूर्णतः टीबी मुक्त बनाने के लिए चौतरफा प्रयास कर रहा है।

