धान की फसल में खरपतवारों से 45% तक घट सकती है पैदावार, समय पर नियंत्रण की सलाह

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राजनांदगांव। पंडित शिव कुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र सुरगी के ‘कृषि तकनीकी सूचना सलाह केंद्र’ द्वारा ग्रामीण उद्यमिता जागरूकता विकास योजना (रेडी) के तहत ग्राम धामनसरा में एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में किसानों को फसलों में खरपतवारों की पहचान और उनके वैज्ञानिक नियंत्रण के प्रभावी उपाय बताए गए।

प्रशिक्षण के दौरान सहायक प्राध्यापक (सस्य विज्ञान) डॉ. संतोष कुमार साहू ने बताया कि यदि खरपतवारों पर समय रहते नियंत्रण न किया जाए, तो धान की उपज में 45 प्रतिशत तक की भारी गिरावट आ सकती है। उन्होंने फसलों में उगने वाले संकरी पत्ती के खरपतवार (सांवा, बदौर, करगा, दूब), चौड़ी पत्ती (कऊवाकेनी, बावची, महकुव, सिलियारी, मुंगेसर) और मोथा प्रजाति (नागर मोथा/चुहका) की पहचान कराई।

फसल में दवा छिड़काव के प्रमुख सुझाव:

मिश्रित खरपतवार: बिसपाइरीबैक सोडियम 10% SC की 100 ML मात्रा प्रति एकड़।

चुहका (मोथा प्रजाति): क्लोरीम्यूरान मेटसल्फुरान 20% चूर्ण की 8 ग्राम दवा प्रति एकड़।

सांवा की अधिकता: फेनोक्साप्राप पी ईथाइल 9.3% EC की 300 ML दवा प्रति एकड़।

विशेषज्ञों ने सलाह दी कि बुवाई या रोपाई के 20 से 25 दिन बाद इन दवाओं की निर्धारित मात्रा को 200 लीटर पानी में घोलकर ही छिड़काव करें। इस अवसर पर कृषि महाविद्यालय के चतुर्थ वर्ष के छात्र (रेडी स्टूडेंट) और बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण किसान उपस्थित रहे।

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