राजनांदगांव। पानी की कमी से जूझ रहे किसानों के लिए राज्य सरकार की ‘फसल परिवर्तन योजना’ वरदान साबित हो रही है। राजनांदगांव विकासखंड के ग्राम गांतापार के किसान राकेश कुमार यादव ने इस योजना का लाभ उठाते हुए पारंपरिक धान की खेती छोड़ अरहर (रहर) की खेती अपनाई है। कम पानी में बेहतर फसल की उम्मीद और शासन से मिलने वाली प्रोत्साहन राशि ने उनकी राह आसान कर दी है।
किसान राकेश यादव के पास कुल 5 एकड़ कृषि भूमि है। उन्होंने बताया कि उनकी अधिकांश जमीन असिंचित होने के कारण धान की खेती में पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता था, जिससे हर साल अच्छी उपज नहीं मिलती थी। इस समस्या से निजात पाने के लिए उन्होंने इस वर्ष 3 एकड़ भूमि में अरहर और केवल 2 एकड़ में धान की फसल लगाई है।
15 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि से मिला प्रोत्साहन
किसान राकेश यादव ने बताया कि शासन द्वारा फसल परिवर्तन (क्रॉप डायवर्सिफिकेशन) अपनाने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 15,000 रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। इस आर्थिक मदद से किसानों को नई और वैकल्पिक फसलें अपनाने की प्रेरणा मिल रही है।
उन्होंने कहा, “पानी की कमी को देखते हुए धान के बजाय अरहर की खेती करना बेहद उपयुक्त है। यह योजना हम जैसे असिंचित क्षेत्र के किसानों के लिए एक बहुत अच्छी और दूरगामी पहल है।”
दूसरे किसानों से भी की वैकल्पिक खेती की अपील
कम लागत और कम पानी में बेहतर आय की उम्मीद जताते हुए राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार प्रकट किया। उन्होंने अन्य किसानों से भी अपील की है कि वे अपनी भूमि की स्थिति और पानी की उपलब्धता के अनुसार धान के मोह से बाहर निकलकर अरहर जैसी वैकल्पिक फसलों की खेती करें और शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं।

