परिवार की खुशहाली में ट्रस्ट, टाइम, टॉक और थैंक्स ये चार टी का बड़ा महत्व है : सुधाकर मुनि

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राजनांदगांव। युग प्रधान गुरुदेव आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री सुधाकर जी ने आज यहां परिवार की खुशहाली के बारे में कहा कि परिवार की खुशहाली में ट्रस्ट, टाइम, टॉक और थैंक्स ये चार टी का बड़ा महत्व है। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों का एक-दूसरे पर ट्रस्ट अर्थात भरोसा होना चाहिए। एक-दूसरे के लिए टाइम अर्थात समय निकालना चाहिए। टॉक अर्थात प्रेम पूर्ण संवाद होना चाहिए और एक-दूसरे के अच्छे कामों के लिए थैंक्स कहने की भावना होनी चाहिए। मुनि श्री ने कहा कि हर आत्मा स्वतंत्र है, परंतु भगवान महावीर का कथन है कि एक जीव का अस्तित्व दूसरे जीव पर आश्रित है। व्यवहारिक जीवन के धरातल पर सुखी जीवन तभी बन सकता है जब परिवार सुखी हो।
मुनि श्री सुधाकर जी ने तेरापंथ भवन में अपने नियमित प्रवचन में कहा कि सात वारों से भी बड़ा कोई वार है तो वह है परिवार। उन्होंने कहा कि जिस परिवार में एकता और अपनापन है, वह परिवार सुखी है और जिस परिवार में छल कपट है, वह परिवार नरक का द्वार है। उन्होंने कहा कि परिवार तो वह होता है जिस परिवार में एक दूसरे पर भरोसा हो। विचार से ही वास्तु का निर्माण होता है। मैं प्रेम लुटाऊंगा तो प्रेम मिलेगा और नफरत लुटाऊंगा तो नफरत मिलेगा। एक-दूसरे पर विश्वास संबंध को प्रगाढ़ बनाता है। विश्वास हमारे रिश्तों की सबसे बड़ी ताकत है। अहम और घमंड ने न जाने आज तक कितने संबंधों को तोड़ा है। खाने में जहर आ जाए तो इसका उपचार संभव किंतु कान में जहर आ जाए तो फिर इसका उपचार संभव नहीं है। इससे निपटने के लिए पहला तीर है विश्वास और दूसरा तीर है टाइम। तलाक का सबसे बड़ा कारण है समय नहीं देना। मोबाइल सब का समय खा गया है। आप परिवार को खुशहाल देखना चाहते हैं तो इसके लिए जरूरी है आप परिवार के सदस्यों को समय दें। बच्चों को समझाने की कोशिश तो होती है, किंतु बच्चों को समझने की कोशिश कभी नहीं होती। हम बच्चों को समझने की कोशिश करें।
मुनि श्री सुधाकर जी ने कहा कि संवाद करना सीखिए। घर में रहते हुए यदि आप आपस में संवाद नहीं करते तो यह परेशानी का कारण है। संवाद से अच्छे-अच्छे मसले सुलझ जाते हैं। संवाद में रोशनी है और विवाद में अंधेरा। घर में आप कोई भी भाषा बोलिए, किंतु उस भाषा में एक भाषा अवश्य शामिल होनी चाहिए वह है प्रेम की भाषा। बिना हड्डी वाले जुबान से निकली बात से अनेक हड्डियां टूट जाती है। एक शब्द पराए को अपना बना सकता है और अपने को पराया। एक शब्द से आप किसी के दिल में उतर सकते हैं और एक शब्द की वजह से आप किसी के दिल से उतर सकते हैं। बोलने से पहले शब्दों का चयन करें।
मुनि श्री ने कहा कि आपके जीवन में शिकायत नहीं धन्यवाद की भावना होनी चाहिए। जीवन का लक्ष्य शिकायत नहीं धन्यवाद होना चाहिए। व्यक्ति प्रशंसा तो पाना चाहता है किंतु धन्यवाद नहीं कहना चाहता! परिवार में बड़ों का सम्मान होना चाहिए, किंतु अधिकार का विकेंद्रीकरण भी होना चाहिए। दूसरों की कमियों को मत देखो, खूबियों को देखो। खूबियों को देखोगे तो धन्यवाद अवश्य कहोगे। समझदार व्यक्ति वही होता है जो दूसरों के झगड़ों से दूर रहता है।
मुनि श्री ने वास्तु के विषय पर कहा कि घर में घड़ी, कांच व झाड़ू का काफी महत्व है और इसे उचित स्थान पर रखना चाहिए। घड़ी बंद नहीं होनी चाहिए और कांच में धूल नहीं जमना चाहिए। कांच में यदि धूल है तो समझ लीजिए कि उस घर में युवा नशा कर रहे हैं। कांच में शक्ति होती है और यदि आपकी सकारात्मक ऊर्जा उस पर जाती है तो हजार गुना सकारात्मक ऊर्जा वापस लौट कर आती है। घर का ईशान कोण जितना शांत रहेगा, हल्का रहेगा और साफ रहेगा तो घर में शांति बनी रहेगी। मंत्रों से परिवार में शांति आती है, दूरियों को हम प्रेम में बदल सकते हैं और परिवार में किसी तरह के अनिष्ट को बदला जा सकता है। मंत्रों, विचारों एवं वास्तु से परिवार में खुशहाली आती है। आज के कार्यक्रम में दुर्ग, भिलाई, रायपुर के तेरापंथ सभा के पदाधिकारी एवं सदस्य गण उपस्थित थे।राजनांदगांव जैन समाज के गणमान्य नागरिक एवं तेरापंथ सभा, महिला मंडल एवं युवक परिषद के पदाधिकारी एवम सदस्यगण उपस्थित थे।

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