यादव तिकड़ी से जिले को विकास की नयी रफ्तार, राजनांदगांव को मिलेगी नई पहचान

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राजनांदगांव। जिले की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में एक सुखद संयोग बनता नजर आ रहा है। कलेक्टर, महापौर और प्रभारी मंत्री—तीनों पदों पर यादव समाज से जुड़े प्रतिनिधि और अधिकारी कार्यरत हैं। यह समरसता और सामंजस्य जिले को विकास की नई दिशा देने का संकेत माना जा रहा है।

राजनांदगांव के राजनीतिक और सामाजिक जानकारों का कहना है कि जिले में पहली बार ऐसा हुआ है जब प्रशासन, नगरीय निकाय और मंत्रिमंडल के अहम पदों पर यादव समाज की मजबूत उपस्थिति देखने को मिल रही है। यह न सिर्फ सामाजिक प्रतिनिधित्व का प्रतीक है, बल्कि समन्वय के ज़रिए कार्यों में तेजी लाने की एक बड़ी संभावना भी बन चुकी है।

डॉ. रमन सिंह की दृष्टि का परिणाम

विशेषज्ञों और स्थानीय राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह संतुलन छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह की दूरदृष्टि और सशक्त नेतृत्व का परिणाम है। विधायक के रूप में भी उन्होंने हमेशा राजनांदगांव की प्रगति को प्राथमिकता दी है। यही कारण है कि आज जिले में नेतृत्व का यह अनूठा समीकरण बना है।

डॉ. सिंह ने न केवल जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़े रखा, बल्कि प्रशासनिक नियुक्तियों और जनप्रतिनिधियों के चयन में भी संतुलन को महत्व दिया। यही कारण है कि अब जिले में एकरूपता के साथ योजनाओं के क्रियान्वयन की संभावना और भी मजबूत हो गई है।

तेजी से होंगे अधूरे कार्य पूरे

अब जबकि जिले के तीन प्रमुख पदों पर सामंजस्य की संभावना प्रबल हो गई है, आम जनता को उम्मीद है कि पूर्ववर्ती वर्षों से लंबित विकास कार्यों को गति मिलेगी। शहर के बुनियादी ढांचे से लेकर ग्रामीण विकास तक, हर मोर्चे पर समन्वित प्रयास दिखने की उम्मीद की जा रही है।

स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि यह तालमेल कायम रहा, तो आने वाले समय में राजनांदगांव न केवल विकास के नए आयाम छुएगा, बल्कि राज्य में एक आदर्श जिले के रूप में भी उभरेगा।

एकजुट नेतृत्व से जागी उम्मीदें

यादव समाज के इन तीनों चेहरों के एकसाथ आने से न सिर्फ सामाजिक सशक्तिकरण को बल मिलेगा, बल्कि नीतिगत फैसलों में भी तेजी आएगी। लोग कह रहे हैं कि अब जिले की तस्वीर बदलने का वक्त आ गया है।

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