राजनांदगांव संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी पूर्व सीएम भूपेश बघेल स्थानीय कांग्रेस नेताओं से दूरियां लगातार बढ़ा रहे हैं या यूं कहें कि वे स्थानीय नेताओं को जिम्मेदारियों के योग्य मानने को तैयार नहीं हैं। छत्तीसगढ़ी में इसे ‘झटकार दिस’ कहा जाता है।
नहीं तो ये यूं ही नहीं हो सकता कि, कई वरिष्ठ और स्थानीय नेताओं को छोड़कर उन्होंने अपना चुनाव अभिकर्ता गिरीश देवांगन को चुना है। सभी जानते हैं कि वे खरोरा के रहने वाले हैं… और हालही में राजनांदगांव विस से चुनाव हारे हैं। बहरहाल, कई नेता ये जिम्मेदारी निर्वहन करना चाहते थे लेकिन भूपेश और उनकी सलाहकार टीम ने एक तरफा फैसला लिया।
इससे पहले जब भूपेश बघेल के लिए नामांकन लिया जाना था तब भी स्थानीय नेताओं को तवज्जो नहीं मिली थी। उनके खास सिपहसालारों ने ये काम निपटाया था।
दरअसल, ये इतना बड़ा मुद्दा भी नहीं है लेकिन ये जरुर है कि ऐसा करने से स्थानीय कांग्रेसियों को फिल्म में सामने आने का मौका नहीं मिल रहा है। उनका रोल क्या है ये भी पहेली की तरह हो गया है। वे अपनी परफॉर्मेंस नहीं दे पा रहे हैं, उनकी तैयारियां जाया जा रही है। वे चुनाव में अपनी भूमिका को लेकर ही भ्रम में हैं। ये संगठन के नेताओं को हतोत्साहित करने वाली बात है।
ये भी देखिए कि, एक तरफ भाजपा के कई नेता रोज बयान जारी कर रहे हैं। अलग-अलग मुद्दों पर कांग्रेस और भूपेश को घेरा जा रहा है। हर मोर्चा-प्रकोष्ठ चुनावी अभियान में अलग-अलग रणनीति के तहत लगा हुआ है। बैठकें हो रहीं, सभाएं हो रही हैं। दूसरी ओर भूपेश और उनकी टीम अकेले घूम रही है। चुनाव कार्यालय में कोई हलचल नहीं है। नेताओं में चुप्पी है। जमीन पर कोई नहीं दिखता। कांग्रेस आरोपों के जवाब भी नहीं दे पा रही है।

