राजनांदगांव। नगरीय निकाय चुनावों के लेकर राजनांदगांव का आरक्षण सामान्य होने पर अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में बड़ी संख्या में दावेदार सक्रीय हो चुके हैं। मौजूदा समय में नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता काबिज है। पिछली दफा आरक्षण अन्य पिछड़ा वर्ग महिला था और पार्षदों ने अपना महापौर चुना था। भाजपा नेत्री स्वर्गीय शोभा सोनी जी को हार का सामना करना पड़ा था और निर्दलीयों को साध कर कांग्रेस ने श्रीमती हेमा देशमुख को महापौर के पद पर आसीन कर दिया।
सामान्य होने पर भाजपा में वैसे तो बहुत से दावेदारों ने अपनी किस्मत आजमाने का फैसला किया है लेकिन संगठन की मानें तो कुछ प्रमुख नाम में से किसी एक पर मुहर लग सकती है।
भारतीय जनता पार्टी में मधुसूदन यादव, नीलू शर्मा, सौरभ कोठारी, अतुल रायजादा, रमेश पटेल, किशुन यदु, मोनू बहादुर सिंह इन नामों में से किसी एक को चुनावी मैदान में उतारा जा सकता है।
बात करें यदि मधुसूदन यादव की तो युवा मोर्चा से राजनीति की शुरुआत करने वाले मधुसूदन यादव का नाम राजनांदगांव के बड़े नेताओं में शुमार हैं। अपने राजनितिक जीवन में उन्होंने पार्षद से लेकर महापौर , सांसद सहित संगठन में जिला अध्यक्ष व् प्रदेश के महत्त्वपूर्ण दायित्वों को निभाया है। निगम की राजनीति को बहुत करीब से समझने का फायदा भी उन्हें मिल सकता है।
जिला युवा मोर्चा और जिला भाजपा कोषाध्यक्ष की कमान सम्हाल चुके सौरभ कोठारी का नाम भी महापौर की दौड़ में प्रमुखता से लिया जा रहा है। आपको बता दें कि पिछले दो दफा भी सौरभ कोठारी का नाम महापौर के दावेदारों में प्रमुखता से लिया जाता रहा है लेकिन आरक्षण की वजह से उन्हें मौक़ा नहीं मिल पाया है।
लम्बे समय से भाजपा की राजनीति में सक्रीय, पूर्व पार्षद और संगठन में उत्तर मंडल के अध्यक्ष सहित अन्य पदों की जिम्मेदारी निभा चुके अतुल रायजादा की दावेदारी भी महापौर के लिए पुख्ता मानी जा रही है। डाक्टर रमन सिंह के करीबी माने जाने वाले अतुल रायजादा के नाम पर ज्यादातर नेताओं की सहमति बनते दिख रही है जिसका फायदा उन्हें मिल सकता है।
भाजपा से ही एक और नाम प्रमुखता से महापौर की दौड़ में शामिल है । नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी सम्हाले हुए किशुन यदु का। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् से अपनी राजनीति की शुरुआत करने वाले किशुन यदु युवा मोर्चा शहर महामंत्री, जिला महामंत्री सहित संगठन में विभिन्न दायित्वों का निर्वहन कर चुके हैं। पिछले तीन वर्षों से निगम में विपक्ष में रहकर कांग्रेस के खिलाफ झंडा बुलंद करने का फायदा उन्हें मिल सकता है ।
जिस हिसाब से भाजपा अब युवाओं को ज्यादा तवज्जो दे रही है उस हिसाब से महापौर की दौड़ में मौजूदा भाजयुमो अध्यक्ष मोनू बहादुर का नाम प्रमुखता से सामने आया है । निगम की सीट सामान्य होने के बाद मोनू बहादुर सिंह स्वाभाविक रूप से महापौर पद के दावेदार बनकर उभरे हैं । समाज सेवा के माध्यम से कम उम्र में ही राजनीति की शुरुआत करने वाले मोनू बहादुर सिंह युवा मोर्चा के शहर उपाध्यक्ष की दो बार जिम्मेदारी सम्हाल चुके हैं साथ ही युवा मोर्चा में ही जिला उपाध्यक्ष पद पर भी वो पूर्व में काबिज रहे हैं । कम उम्र के यवाओं से लेकर संगठन के सभी वरिष्ठ नेताओं से बेहतर तालमेल व् युवाओं की बड़ी फ़ौज और लोकप्रियता का फायदा मोनू को मिल सकता है।
महापौर पद के दावेदारों में वेयर हाउस कार्पोरेशन के पूर्व अध्यक्ष और युवा मोर्चा प्रदेश में विभिन्न जिम्मेदारियां निभा चुके मौजूदा प्रदेश प्रवक्ता नीलू शर्मा भी प्रमुखता से शामिल हैं। आपको बता दें कि नीलू शर्मा की कार्यप्रणाली सहित उनके पिता अशोक शर्मा की राजनितिक पकड़ का भी उन्हें बड़ा फायदा मिल सकता है।
मौजूदा भाजपा जिला अध्यक्ष रमेश पटेल भी महापौर के दावेदारों में शुमार हैं। संगठन में लम्बे समय से सक्रीय रमेश पटेल राजगामी सम्पदा के अध्यक्ष सहित संगठन में बहुत से पदों का दायित्व बखूबी सम्हाल चुके हैं जिसका फायदा उन्हें मिल सकता है।

