जिला प्रशासन की बड़ी कार्रवाई : कुष्ठ रोगियों के नाम पर आवंटित 22.90 एकड़ शासकीय भूमि की लीज निरस्त, शासन के आधिपत्य में लौटी जमीन

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राजनांदगांव। जिला प्रशासन ने शासकीय भूमि के दुरुपयोग और लीज शर्तों के गंभीर उल्लंघन के मामलों में एक बड़ी और सख्त कार्रवाई की है। ग्राम नंदई (तहसील व जिला राजनांदगांव) स्थित 22.90 एकड़ बहुमूल्य शासकीय भूमि की लीज डीड को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया है। यह जमीन मूल रूप से कुष्ठ रोगियों के निःशुल्क उपचार और पुनर्वास के उद्देश्य से संस्था को आवंटित की गई थी, लेकिन जांच में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए इसका व्यावसायिक उपयोग किए जाने का खुलासा हुआ है। प्रशासन ने संपूर्ण भूमि को पुनः छत्तीसगढ़ शासन के आधिपत्य में निहित कर लिया है।

बिना अनुमति कब्जा हस्तांतरण और व्यावसायिक गतिविधियां

प्रशासनिक जांच में सामने आया कि कुष्ठ रोगियों के कल्याण के लिए दी गई इस जमीन पर मूल लीजधारी संस्था के बजाय अन्य संस्था का अवैध कब्जा था। संबंधित संस्था का पंजीयन वर्ष 1993 में हुआ था, जबकि लीज की शर्तों के मुताबिक सक्षम अनुमति के बिना जमीन का हस्तांतरण या कब्जा अन्य को सौंपना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर परिसर का उपयोग व्यावसायिक गतिविधियों के लिए किया जा रहा था और इलाज के नाम पर अवैध आर्थिक लाभ कमाया जा रहा था।

मात्र 3 मरीज मिले, तालाब और भवनों को दिया गया था किराए पर

जांच के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि संस्था की वित्तीय वर्ष 2024-25 की सीए ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, सालभर में वहां औसतन केवल 3 मरीज ही इलाजरत पाए गए। इसके उलट, 22.90 एकड़ के विशाल परिसर का व्यावसायिक दोहन किया जा रहा था:

तालाब का ठेका: परिसर के भीतर स्थित करीब 1.50 एकड़ के तालाब को मछली पालन के लिए ठेके पर दिया गया था।

कृषि भूमि व भवन: कृषि भूमि को निजी कृषकों को ‘रेघा’ पर तथा पक्के भवनों व क्वार्टरों को किराए एवं रेंट एग्रीमेंट पर अन्य लोगों को सौंपा गया था।
लगभग 43 वर्षों से इन गतिविधियों की जानकारी सक्षम प्राधिकारी से छिपाई गई थी।

स्वास्थ्य विभाग के प्रतिवेदन और नियमों के तहत कार्रवाई

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के प्रतिवेदन में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में ‘राष्ट्रीय कुष्ठ उन्मूलन कार्यक्रम’ के तहत घर-घर सर्वे और शासकीय अस्पतालों के माध्यम से कुष्ठ रोगियों को निःशुल्क दवाइयां व बेहतर चिकित्सा मिल रही है, जिससे इस संस्था की कोई आवश्यकता परिलक्षित नहीं हो रही थी। छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता, 1959 के प्रावधानों के तहत लीज शर्तों के प्रत्यक्ष उल्लंघन पर यह सख्त कार्रवाई की गई।

तहसीलदार को 7 दिन में भौतिक कब्जा लेने के निर्देश

जिला प्रशासन ने राजनांदगांव तहसीलदार को निर्देशित किया है कि शासकीय अभिलेखों से संबंधित संस्था का नाम हटाकर तत्काल ‘छत्तीसगढ़ शासन’ दर्ज किया जाए और 7 दिवस के भीतर 22.90 एकड़ भूमि का भौतिक कब्जा प्राप्त किया जाए। साथ ही, सीएमएचओ को यह भी निर्देश दिए गए हैं कि यदि परिसर में वर्तमान में कोई कुष्ठ रोगी इलाजरत है, तो उसके सुरक्षित स्थानांतरण, भोजन, आवास और निःशुल्क चिकित्सा की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

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