➡️ धान खरीदी की समय सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाने शासन के समक्ष रखी बात
➡️ पदम कोठारी ने उठाया किसानों का मुद्दा
राजनांदगांव।
जिले में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। खेतों में पककर तैयार खड़ी धान की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। कई स्थानों पर धान की फसल बारिश के कारण खेतों में गिर गई है जिससे कटाई और मिंजाई का काम प्रभावित हो रहा है। इस प्राकृतिक आपदा से किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे कठिन समय में प्रभावित किसानों को तत्काल राहत और उचित मुआवजा देने की मांग उठने लगी है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महासचिव एवं अविभाजित जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष पदम कोठारी ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा देने की मांग की है। उन्होंने कहा कि बेमौसम बारिश ने किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों ने बड़ी उम्मीदों के साथ फसल तैयार की थी लेकिन मौसम की मार ने उनकी आर्थिक स्थिति को प्रभावित कर दिया है। ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह किसानों को संकट की इस घड़ी में राहत पहुंचाए। श्री कोठारी ने मांग की है कि जिले के सभी प्रभावित गांवों में तत्काल फसल क्षति का सर्वे कराया जाए। सर्वे पूरी पारदर्शिता के साथ हो, ताकि किसी भी प्रभावित किसान का नाम छूटने न पाए। जिन किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा है, उन्हें राजस्व पुस्तक परिपत्र (आरबीसी) की धारा 6-4 के अंतर्गत आपदा राहत कोष से उचित मुआवजा राशि प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि केवल सर्वे कराने से किसानों की समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मुआवजे की राशि भी बिना देरी किए उनके खातों तक पहुंचाई जानी चाहिए। श्री कोठारी ने धान खरीदी की निर्धारित समय सीमा बढ़ाने का मुद्दा भी शासन के समक्ष रखा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बेमौसम बारिश के चलते खेतों में धान की कटाई, मिंजाई और उपज को सुरक्षित रखने का काम प्रभावित हुआ है। कई किसानों का धान अभी खेतों में पड़ा हुआ है। बारिश के कारण धान को सुखाने और उपार्जन केंद्रों तक पहुंचाने में भी परेशानी हो रही है। ऐसी स्थिति में 15 जनवरी की निर्धारित अंतिम तिथि तक सभी किसानों के लिए अपनी उपज बेच पाना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने शासन से मांग की है कि किसानों की वास्तविक परिस्थितियों को देखते हुए धान खरीदी की अंतिम तिथि 15 जनवरी के स्थान पर बढ़ाकर 31 जनवरी की जाए, ताकि प्रभावित किसानों को अपनी उपज तैयार करने और समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए पर्याप्त समय मिल सके। उन्होंने कहा कि खरीदी की समय सीमा नहीं बढ़ाई गई तो अनेक किसान अपनी मेहनत से उपजाए धान को बेचने से वंचित रह सकते हैं। श्री कोठारी ने कहा कि किसानों के सामने एक ओर प्राकृतिक आपदा का संकट है, वहीं दूसरी ओर धान खरीदी की समय सीमा को लेकर चिंता बनी हुई है। ऐसे में सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए किसानों के हित में तत्काल निर्णय लेना चाहिए। किसानों को राहत देने के बजाय उन्हें सरकारी प्रक्रियाओं और समय सीमा के बीच उलझाना उचित नहीं है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार किसानों के साथ अन्याय और उनकी समस्याओं की अनदेखी न करे। प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा देने के साथ धान खरीदी की समय सीमा 31 जनवरी तक बढ़ाई जाए। यदि किसानों की जायज मांगों पर समय रहते निर्णय नहीं लिया गया तो सरकार को किसानों के आक्रोश और विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना होगा।





