चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव की आशंका को देखते हुए राजनांदगांव के किसानों को सतर्क रहने की सलाह
- इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय की कृषि मौसम सलाह के अनुरूप फसल सुरक्षा उपाय अपनाने की अपील
- प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 में 142283.89 हेक्टेयर क्षेत्र का हुआ बीमा पंजीयन राजनांदगांव 28 अक्टूबर 2026। बंगाल की खाड़ी में विकसित हुए चक्रवाती तूफान अर्नब के संभावित प्रभाव तथा छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में वर्षा की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग द्वारा किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की मौसम संबंधी चेतावनियों एवं इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायपुर की कृषि मौसम सलाह के अनुरूप किसानों से धान, दलहन, तिलहन, उद्यानिकी फसलों एवं पशुधन की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी अपनाने की अपील की गई है।
फसलों की सुरक्षा के लिए आवश्यक सावधानी
- कृषि विभाग द्वारा किसानों को आवश्यक उपाय अपनाने की दी गई सलाह आगामी दो से चार दिनों तक पक चुकी धान, दलहन एवं तिलहन फसलों की कटाई मौसम की स्थिति को देखते हुए स्थगित रखें। पहले से कटी हुई फसलों को सुरक्षित, सूखे एवं ढके हुए स्थान पर रखें। खलिहान में रखी उपज को तिरपाल से ढककर सुरक्षित करें। खेतों की नालियों एवं जल निकासी मार्गों को साफ रखें, ताकि वर्षा की स्थिति में जलभराव से फसलों को नुकसान न हो। करेला, लौकी जैसी लता वाली सब्जियों, केले के पौधों तथा फलदार वृक्षों को आवश्यकतानुसार सहारा प्रदान करें। बारिश के दौरान कीटनाशक एवं कवकनाशक का छिड़काव न करें। रोग या कीट के लक्षण दिखाई देने पर मौसम साफ होने के बाद कृषि विशेषज्ञों की सलाह से उपचार करें। रबी फसलों की बुवाई खेत की नमी एवं मौसम की परिस्थितियों को ध्यान में रखकर करें। परिस्थितियां अनुकूल होने पर नवंबर के प्रथम सप्ताह से बुवाई प्रारंभ करने पर विचार करें। पशुओं को सुरक्षित एवं सूखे स्थान पर रखें। उन्हें पेड़ों के नीचे अथवा खुले स्थान पर न बांधें तथा सूखे चारे और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2026 में 142283.89 हेक्टेयर क्षेत्र का बीमा पंजीयन
किसानों को प्राकृतिक आपदाओं एवं प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों से होने वाली संभावित फसल क्षति के विरूद्ध आर्थिक सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत खरीफ 2026 में राजनांदगांव जिले में विभिन्न फसलों का बीमा पंजीयन किया गया है। उपलब्ध फसलवार आंकड़ों के अनुसार जिले में कुल 142283.89 हेक्टेयर क्षेत्रफल का फसल बीमा पंजीयन दर्ज किया गया है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अंतर्गत धान सिंचित 29931.56 हेक्टेयर, धान असिंचित 111776.50 हेक्टेयर, सोयाबीन 504.01 हेक्टेयर, अरहर (तुअर) 64.30 हेक्टेयर, कोदो एवं कुटकी 4.19 हेक्टेयर एवं उड़द 3.33 हेक्टेयर फसलवार बीमित क्षेत्रफल है। जिले में धान की फसल अंतर्गत सर्वाधिक क्षेत्रफल का बीमा पंजीयन हुआ है। किसानों से फसल बीमा से संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें तथा प्रतिकूल मौसम अथवा प्राकृतिक आपदा से फसल क्षति होने पर योजना के प्रावधानों के अनुसार समय-सीमा में सूचना देकर दावा प्रक्रिया पूरी करने की अपील की गई है।
फसल क्षति होने पर टोल-फ्री हेल्पलाइन 14447 पर दें सूचना
प्राकृतिक आपदा अथवा प्रतिकूल मौसम के कारण फसल क्षति होने पर किसान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की कृषि रक्षक हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर 14447 पर संपर्क कर सकते हैं। किसान टोल-फ्री नंबर के माध्यम से फसल बीमा संबंधी जानकारी प्राप्त करने, शिकायत दर्ज कराने तथा फसल क्षति की सूचना देने के संबंध में सहायता ले सकते हैं।
किसानों को क्षतिग्रस्त फसल की तस्वीरें एवं संबंधित दस्तावेज सुरक्षित रखें और निर्धारित समय-सीमा के भीतर संबंधित बीमा कंपनी, कृषि विभाग के मैदानी अमले अथवा संबंधित कृषि अधिकारी को नियमानुसार सूचना देने की सलाह दी गई है। दावा प्रक्रिया एवं सूचना की समय-सीमा की जानकारी आधिकारिक पोर्टल प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से भी प्राप्त की जा सकती है।
मौसम की आधिकारिक जानकारी के आधार पर करें कृषि कार्य
कृषि विभाग द्वारा किसानों को भारत मौसम विज्ञान विभाग की ताजा जानकारी एवं आधिकारिक चेतावनियों के आधार पर ही कृषि कार्यों की योजना बनाने की सलाह दी गई है। विभाग का मैदानी अमला किसानों को आवश्यक तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने तथा फसलों की स्थिति पर निगरानी रखने के लिए सतर्क है।






