राजनांदगांव। शहर के गोलबाजार स्थित मटन, चिकन और मछली मार्केट को हटाए जाने की चर्चाओं के बीच व्यापारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। सोमवार को गोलबाजार मटन, चिकन एवं मछली व्यापारी संघ ने महापौर मधुसूदन यादव के नाम ज्ञापन देकर बाजार को वर्तमान स्थान से नहीं हटाने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि यह बाजार करीब 125 वर्ष पुराना है और इससे 100 से 150 परिवारों की आजीविका जुड़ी हुई है। बाजार हटाए जाने की स्थिति में इन परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
व्यापारियों ने ज्ञापन में बताया कि पिछले कुछ दिनों से समाचार पत्रों के माध्यम से गोलबाजार स्थित मटन, चिकन और मछली मार्केट को हटाने की तैयारी की जानकारी मिल रही है। इससे व्यापारियों में चिंता है। उनका कहना है कि अधिकांश दुकानदार लंबे समय से इसी व्यवसाय के माध्यम से अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। उनके पास आय का कोई दूसरा साधन नहीं है।
व्यापारियों ने गौरीनगर में सामने आए गोवंश वध के मामले की निंदा करते हुए दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि इस घटना से शहर का माहौल प्रभावित हुआ है, लेकिन इसकी आड़ में वर्षों से संचालित वैध व्यवसाय को बंद कराना उचित नहीं होगा।
व्यापारी संघ ने आरोप लगाया कि कुछ संगठन इस घटना को आधार बनाकर मटन, चिकन और मछली मार्केट को हटाने की मांग कर रहे हैं। इससे उन व्यापारियों की आजीविका प्रभावित होगी, जिनका इस घटना से कोई संबंध नहीं है।
ज्ञापन में बताया गया कि गोलबाजार के मटन-मछली मार्केट में हिंदू और मुस्लिम सहित विभिन्न समुदायों के लोग व्यवसाय करते हैं। इनमें ढीमर समाज के व्यापारी भी शामिल हैं। यहां हलाल और झटका मांस के विक्रेताओं के साथ मछली विक्रेता भी लंबे समय से व्यापार कर रहे हैं।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में सभी समुदायों के लोग आपसी भाईचारे और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवसाय करते आए हैं। उन्होंने दावा किया कि बाजार के कारण कभी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई और न ही किसी की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने का प्रयास किया गया।
व्यापारी संघ ने कहा कि गोलबाजार में मटन-मछली मार्केट की व्यवस्था रियासतकाल से चली आ रही है। बाजार शहर के मध्य में होने के कारण ग्राहकों के लिए भी सुविधाजनक है। व्यापारियों ने दावा किया कि वे स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी शासन-प्रशासन तथा नगर निगम के निर्देशों का पालन करते हैं।
संघ ने महापौर से मांग की है कि बाजार को वर्तमान स्थान पर ही संचालित होने दिया जाए। साथ ही किसी भी संगठन या व्यक्ति द्वारा व्यापार में व्यवधान उत्पन्न करने की स्थिति में आवश्यक कार्रवाई की जाए। व्यापारियों ने कहा कि बाजार हटाने का निर्णय लेने से पहले इससे जुड़े परिवारों की आजीविका और आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखा जाना चाहिए।





