राजनांदगांव। विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष श्री शिव वर्मा ने नवरात्रि के अवसर पर आयोजित होने वाले गरबा आयोजनों में बढ़ती फूहड़ता एवं अश्लीलता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि गरबा केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी धार्मिक आस्था, संस्कृति और परंपरा से जुड़ा हुआ आयोजन है। इसकी गरिमा एवं मर्यादा बनाए रखना आयोजकों के साथ-साथ प्रत्येक सहभागी की जिम्मेदारी है।
श्री वर्मा ने कहा कि, वर्तमान समय में कुछ गरबा आयोजनों में ऐसे गीत, नृत्य, वेशभूषा एवं गतिविधियां देखने को मिल रही हैं, जो गरबा की मूल भावना और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे आयोजनों में फूहड़ता, अश्लीलता और आपत्तिजनक व्यवहार पर प्रभावी रूप से रोक लगाई जानी चाहिए।
उन्होंने गरबा आयोजकों से अपील की कि, आयोजन स्थल पर अनुशासन, शालीनता एवं पारिवारिक वातावरण सुनिश्चित किया जाए। गीत संगीत के चयन, नृत्य की मर्यादा तथा प्रतिभागियों के आचरण को लेकर आयोजक आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करें और उनका पालन भी सुनिश्चित करें। विशेष रूप से महिलाओं एवं युवतियों के सम्मान और सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए।
विश्व हिंदू परिषद नगर अध्यक्ष ने कहा कि, नवरात्रि मां दुर्गा की आराधना और शक्ति उपासना का पर्व है। इसलिए गरबा आयोजन में हमारी धार्मिक भावनाओं और सनातन संस्कृति के अनुरूप वातावरण होना चाहिए। आधुनिकता और मनोरंजन के नाम पर ऐसी गतिविधियों को बढ़ावा नहीं दिया जाना चाहिए, जिनसे समाज में गलत संदेश जाए अथवा हमारी सांस्कृतिक परंपराओं की गरिमा प्रभावित हो।
श्री वर्मा ने प्रशासन से भी आग्रह किया कि गरबा आयोजनों में निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के साथ-साथ अश्लीलता, छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार एवं अनुशासनहीनता के मामलों में सख्ती बरती जाए। साथ ही आयोजकों से अपेक्षा की कि वे सुरक्षा व्यवस्था, प्रवेश व्यवस्था एवं निगरानी के पर्याप्त प्रबंध करें।
उन्होंने आगे कहा कि, विश्व हिंदू परिषद किसी भी स्वस्थ, पारिवारिक एवं सांस्कृतिक गरबा आयोजन के पक्ष में है। हमारा उद्देश्य किसी की धार्मिक आस्था या उत्सव की भावना को ठेस पहुंचाना नहीं, बल्कि गरबा को उसकी धार्मिक, सांस्कृतिक और पारिवारिक मर्यादा के अनुरूप बनाए रखना है।
इसी कड़ी में श्री वर्मा ने सभी गरबा आयोजन समितियों से गरबा स्थलों की मर्यादा और धार्मिक पवित्रता बनाए रखने की भावुक अपील की है। उन्होंने कहा कि गरबा केवल नृत्य या मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि मां जगदंबा की भक्ति और उपासना का पावन पर्व है।
श्री वर्मा ने आयोजकों से स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि गरबा पंडालों में अश्लील और फुहड़ गीतों का प्रयोग पूरी तरह वर्जित होना चाहिए। इसके स्थान पर केवल पारंपरिक, भक्तिमय और धार्मिक गीतों पर ही गरबा का आयोजन किया जाए, जिससे गरबा स्थलों की पवित्रता और पारिवारिक माहौल बना रहे।
इसके साथ ही, भारतीय संस्कृति और अतिथियों के आदर-सत्कार की परंपरा को रेखांकित करते हुए उन्होंने अपील की कि गरबा स्थलों पर आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का माथे पर तिलक लगाकर आत्मीय स्वागत किया जाए। श्री वर्मा का मानना है कि इस पहल से पंडालों में सकारात्मक और धार्मिक ऊर्जा का संचार होगा और युवा पीढ़ी अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ सकेगी।


