राजनांदगांव। मजदूरी करके अपने परिवार का गुजर-बसर करने वाली एक मां का सपना था कि उनका बेटा भी बड़े स्कूल में पढ़े, फर्राटेदार अंग्रेजी बोले, कंप्यूटर सीखे और एक उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करे। हालांकि, सीमित आय के कारण निजी स्कूल की फीस और हॉस्टल का खर्च उठाना बेहद कठिन था। लेकिन शासन की कल्याणकारी योजना ने इस असंभव से दिख रहे सपने को सच कर दिखाया है।
यह कहानी है राजनांदगांव शहर के ममता नगर (वार्ड क्रमांक 18) की निवासी निर्माणी श्रमिक श्रीमती लिलेश्वरी सिन्हा की। ठेकेदार के अधीन मजदूरी का कार्य करने वाली लिलेश्वरी के बेटे पिवेद सिन्हा ने कक्षा 5वीं की परीक्षा उत्कृष्ट अंकों से उत्तीर्ण की थी। इसी दौरान उन्हें श्रम विभाग के अधिकारियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मंडल अंतर्गत संचालित ‘अटल उत्कृष्ट शिक्षा सहायता योजना’ की जानकारी मिली।
संस्कार सिटी इंटरनेशनल स्कूल में मिला दाखिला:
श्रम विभाग के पोर्टल पर आवेदन करने के बाद कक्षा 5वीं की प्रावीण्य सूची के आधार पर पिवेद का चयन संस्कार सिटी इंटरनेशनल स्कूल, राजनांदगांव में हुआ। वर्तमान में पिवेद कक्षा 6वीं में अध्ययनरत है। इस योजना के तहत उसे कक्षा 6वीं से 12वीं तक पूरी तरह निःशुल्क शिक्षा मिलेगी। स्कूल की ट्यूशन फीस, हॉस्टल का खर्च, पौष्टिक भोजन, गणवेश (यूनिफॉर्म) तथा किताब-कॉपी सहित तमाम शैक्षणिक सुविधाओं का पूरा व्यय मंडल द्वारा वहन किया जा रहा है।
सरकार की पहल पर जताया आभार:
योजना का लाभ मिलने पर राहत महसूस करते हुए लिलेश्वरी सिन्हा ने कहा कि पहले बेटे की आगे की पढ़ाई और खर्चों को लेकर काफी चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब यह बोझ पूरी तरह दूर हो गया है। उन्होंने समय पर मार्गदर्शन देने के लिए श्रम विभाग के अधिकारियों का धन्यवाद दिया। साथ ही जरूरतमंद परिवारों के बच्चों का भविष्य संवारने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उनके बेटे के उज्ज्वल भविष्य की एक मजबूत नींव है।


