‘म्यूल अकाउंट’ देकर ठगों की मदद करने वाला छठा आरोपी डोंगरगढ़ से गिरफ्तार, भेजा गया जेल

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राजनांदगांव। ऑनलाइन धोखाधड़ी और साइबर अपराधों पर नकेल कसने के लिए राजनांदगांव पुलिस द्वारा चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत एक और बड़ी सफलता मिली है। थाना सिटी कोतवाली और सीएसपी स्क्वायड की संयुक्त टीम ने साइबर ठगी में प्रयुक्त होने वाले ‘म्यूल अकाउंट’ (किराए के बैंक खाते) के एक और खाताधारक को गिरफ्तार किया है। आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

डोंगरगढ़ से पकड़ा गया आरोपी
पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी का नाम आशुतोष चौधरी (उम्र 24 वर्ष) है, जो डोंगरगढ़ के कालका पारा (रेलवे स्टेशन के सामने) का रहने वाला है। जांच में सामने आया कि आरोपी ने विभिन्न बैंक खातों के माध्यम से साइबर धोखाधड़ी की अवैध राशि को प्राप्त करने और उसे आगे ट्रांसफर करने के उद्देश्य से अपने खाते अपराधियों को उपलब्ध कराए थे।

गृह मंत्रालय के पोर्टल से मिला था इनपुट
इस पूरे नेटवर्क का खुलासा भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा संचालित भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के समन्वय पोर्टल से प्राप्त जानकारी के आधार पर हुआ। जांच में पाया गया कि राजनांदगांव जिले के कई बैंक खातों का उपयोग देश भर में हो रही साइबर ठगी के पैसों को खपाने के लिए किया जा रहा था। इस पर सिटी कोतवाली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की थी।

पूर्व में 6 आरोपी भेजे जा चुके हैं जेल
पुलिस इस मामले में पहले ही छह अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट न्यायालय में पेश कर चुकी है। पूर्व में गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं:

विजय कुमार देवांगन (मोतीपुर)

मिहिर साहू (लखोली)

चेतन निर्मलकर (रामपुर)

किरण रहेकवार (ममता नगर)

केजा बाई यादव (राजनांदगांव)

राधिका यादव (घोरदा)

इसी कड़ी में साक्ष्यों के आधार पर अब सातवें आरोपी आशुतोष चौधरी को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इस कार्रवाई में कोतवाली थाना प्रभारी निरीक्षक उपेंद्र कुमार शाह, सउनि गणेश चौहान, प्रआर अखिल अंबादे, आरक्षक सेहल साहू और विकास केशरवानी की सराहनीय भूमिका रही।

विशेष बॉक्स समाचार: क्या है म्यूल अकाउंट और आप कैसे बचें?
क्या होता है ‘म्यूल अकाउंट’?
यह ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने, ट्रांसफर करने या निकालने के लिए करते हैं। शातिर ठग आम लोगों को पैसों का लालच या कमीशन देकर उनके नाम पर खाते खुलवाते हैं या उनके चालू खातों का उपयोग करते हैं।

बचाव के तरीके और पुलिस की अपील:
राजनांदगांव पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे जागरूक रहें और निम्नलिखित बातों का विशेष ध्यान रखें:

गोपनीयता रखें: किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या मोबाइल सिम इस्तेमाल करने के लिए न दें।

लालच से बचें: कमीशन या बिना मेहनत बड़ी रकम कमाने के किसी भी झांसे में न आएं।

खाता बेचना अपराध: अपना बैंक खाता किराए पर देना या बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे खातों का उपयोग गेमिंग, डिजिटल अरेस्ट और सेक्सटॉर्शन जैसी ठगी में होता है। संलिप्त पाए जाने पर खाताधारकों के खिलाफ भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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