राजनांदगांव। बरगा के समीप लगभग 22 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित रेलवे ओवरब्रिज के लोकार्पण से पूर्व ही मुख्य पुल मार्ग के बीचों-बीच दरारें, धंसाव तथा गड्ढे दिखाई देने का मामला सामने आया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस पुल पर अभी नियमित यातायात भी प्रारंभ नहीं हुआ, उसमें समय से पहले इस प्रकार की क्षति आखिर क्यों उत्पन्न हुई? इस गंभीर मामले की जानकारी मिलते ही जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विपिन यादव एवं विधायक हर्षिता स्वामी बघेल कांग्रेसजनों के साथ मौके पर पहुंचे और स्थल का निरीक्षण किया।
जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनीस खान ने जारी बयान में बताया कि निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि मुख्य पुल मार्ग के क्षतिग्रस्त हिस्से पर सीमेंट डालकर पैच रिपेयर (मरम्मत) किया जा रहा था, यदि निर्माण कार्य स्वीकृत डिजाइन, निर्धारित गुणवत्ता एवं तकनीकी मानकों के अनुरूप हुआ है, तो लोकार्पण से पहले ही मुख्य पुल मार्ग पर दरारें और धंसाव क्यों आए तथा उन्हें तत्काल पैच रिपेयर करने की आवश्यकता क्यों पड़ी? सबसे गंभीर बात यह रही कि दरारों एवं क्षतिग्रस्त हिस्सों पर सीमेंट भरकर उन्हें ढंकने तथा उनकी वास्तविक स्थिति को छिपाने का प्रयास किया जा रहा था, यदि निर्माण कार्य पूरी तरह गुणवत्तापूर्ण था, तो फिर दोषों को तत्काल ढंकने की आवश्यकता ही क्यों पड़ी? यह पूरा घटनाक्रम निर्माण कार्य की गुणवत्ता, विभागीय निगरानी एवं गुणवत्ता परीक्षण की प्रक्रिया पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है।
उन्होंने बताया कि समाचार पत्रों में प्रकाशित तथ्यों एवं स्थानीय ग्रामीणों द्वारा व्यक्त की गई आशंकाओं के अनुसार निर्माण के दौरान निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण भराव सामग्री के स्थान पर निम्न गुणवत्ता की मुरूम एवं मिट्टी का उपयोग किए जाने की बात सामने आई है, यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है, तो यह निर्माण गुणवत्ता से समझौता एवं सार्वजनिक धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला होगा।
जिलाध्यक्ष विपिन यादव एवं विधायक हर्षिता स्वामी बघेल ने कहा कि किसी भी पुल की गुणवत्ता उसकी स्वीकृत डिजाइन, निर्धारित तकनीकी मानकों, गुणवत्तापूर्ण निर्माण सामग्री, उचित कम्पेक्शन (संपीड़न), प्रभावी जल निकासी व्यवस्था तथा नियमित गुणवत्ता परीक्षण पर आधारित होती है, यदि लोकार्पण से पूर्व ही मुख्य पुल मार्ग पर दरारें, धंसाव एवं गड्ढे दिखाई दे रहे हैं, तो इसकी स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय तकनीकी जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक कारणों का पता चल सके तथा भविष्य में किसी संभावित जनहानि अथवा दुर्घटना की आशंका को समाप्त किया जा सके।
उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि केंद्र में भाजपा की सरकार, राज्य में भाजपा की सरकार, क्षेत्र के सांसद भाजपा के विधायक भाजपा के तथा यह पुल विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के विधानसभा क्षेत्र में स्थित है, फिर भी करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर इस प्रकार के सवाल उठना बेहद चिंताजनक है। सांसद आए दिन पुलों और सड़कों का उदाहरण देकर विकास के बड़े-बड़े दावे करते हैं, किंतु बरगा रेलवे ओवरब्रिज की स्थिति उन दावों की वास्तविकता उजागर कर रही है। जिले के अधिकांश पुलों एवं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर समय-समय पर गंभीर शिकायतें सामने आती रही हैं। यह घटना उन आशंकाओं को और मजबूत करती है, इसलिए पूरे जिले में हाल ही में निर्मित प्रमुख पुलों एवं बड़े निर्माण कार्यों का भी स्वतंत्र गुणवत्ता परीक्षण कराया जाना चाहिए।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि इस पूरे मामले की स्वतंत्र एवं उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाए। निर्माण एजेंसी, संबंधित विभागीय अधिकारियों, गुणवत्ता परीक्षण से जुड़े अधिकारियों तथा ठेकेदार की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, यदि जांच में निर्माण गुणवत्ता में गंभीर अनियमितता अथवा मानकों से समझौता सिद्ध होता है तो संबंधित ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट किया जाए तथा प्रभावित हिस्से का पुनर्निर्माण स्वीकृत डिजाइन एवं सभी तकनीकी मानकों के अनुरूप कराया जाए।
जिलाध्यक्ष विपिन यादव ने कहा कि जिला कांग्रेस कमेटी शीघ्र ही एक प्रतिनिधिमंडल के साथ संबंधित उच्च अधिकारियों से मुलाकात कर पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई तथा गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण की मांग करेगी। जनता के टैक्स के पैसों से होने वाले विकास कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही अथवा भ्रष्टाचार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निरीक्षण के दौरान जिला कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता अनीस खान, पंकज बांधव, कांति बंजारे, दुर्गेश द्विवेदी, विजयराज चौहान, चुम्मन साहू, मतीन खान, अमित अग्रवाल, विष्णु लोधी, अकील मेमन सहित अन्य कांग्रेसजन उपस्थित थे।

