राजनांदगांव। “किराए के घर को कितना भी संवारो या सजाओ, वह हमेशा पराया ही रहता है। जब बारिश होती थी, तो मकान मालिक हमें कपड़े सुखाने तक की जगह नहीं देते थे। बच्चों के खेलने पर पाबंदी थी और हर छोटी बात पर विवाद होता था। उमस भरे उस छोटे से कमरे में पूरा परिवार घुट-घुट कर जीता था। लेकिन प्रधानमंत्री आवास योजना ने हमारी जिंदगी बदल दी और आज हमारा स्वयं का सुंदर आशियाना है।” यह भावुक कर देने वाले बोल शंकरपुर निवासी श्रीमती आशा पराते के हैं, जिनका परिवार अब अपने खुद के पक्के मकान में सुकून की जिंदगी बसर कर रहा है।
दरअसल, आशा के पति संतोष कुमार पराते पेशे से ऑटो मैकेनिक हैं। कम आय होने के कारण पत्नी और तीन बच्चों के इस छोटे से परिवार के लिए खुद का मकान बनाना एक बेहद चुनौतीपूर्ण सपना था।
खर्चों में कटौती कर खरीदी जमीन, फिर योजना से मिली मदद
संतोष पराते ने विपरीत परिस्थितियों के बीच हार नहीं मानी। अपने छोटे बेटे ऋषभ के जन्म के बाद उन्होंने और उनकी पत्नी ने पेट काटकर, अपने दैनिक खर्चों में भारी कटौती की। बूंद-बूंद से घड़ा भरने की तर्ज पर उन्होंने पैसे जोड़े और साल 2023 में एक छोटा सा जमीन का टुकड़ा खरीदा। जमीन खरीदने के बाद पक्का मकान बनाने के लिए उन्होंने नगर पालिक निगम में आवेदन किया। कुछ ही दिनों के भीतर उन्हें ‘प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0’ (शहरी) के तहत मकान बनाने की शासकीय स्वीकृति मिल गई। किस्तों में मिली राशि और खुद की जमापूंजी से आज उनका सर्वसुविधायुक्त पक्का मकान बनकर तैयार है, जिसमें टाइल्स वाले कमरे, सुंदर आंगन और व्यवस्थित किचन है।
राजनांदगांव में तेजी से स्वीकृत हो रहे आवास
योजना की प्रगति: राजनांदगांव शहर में प्रधानमंत्री आवास योजना 2.0 शहरी के माध्यम से अब तक कुल 869 आवासों की स्वीकृति बी.एल.सी. (हितग्राही द्वारा स्वयं निर्माण) घटक के तहत शासन से प्राप्त हो चुकी है।
निर्माणाधीन मकान: महापौर श्री मधुसूदन यादव एवं निगम आयुक्त श्री अतुल विश्वकर्मा के कुशल मार्गदर्शन में नगर निगम की टीम तेजी से काम कर रही है। अब तक शहर के विभिन्न वार्डों में 54 आवासों का निर्माण पूरी तरह से संपन्न हो चुका है, जबकि 520 आवास निर्माण के विभिन्न चरणों में हैं।
पूरे परिवार ने जताया प्रशासन का आभार:
अब मानसून की आहट के बीच संतोष पराते का परिवार बेहद खुश है। अब उन्हें बारिश में छत टपकने या मकान मालिक की प्रताड़ना का कोई डर नहीं है। अपनी खुशियों को साझा करते हुए मैकेनिक संतोष और उनकी पत्नी आशा ने देश के नेतृत्व और नगर निगम की पूरी टीम को सहृदय धन्यवाद दिया है, जिनकी वजह से आज उनके बच्चों को अपने घर के आंगन में खुलकर हंसने और खेलने का अधिकार मिला है।

