राजनांदगांव। कृषि विभाग ने किसानों से धान सहित अन्य फसलों में नैनो यूरिया एवं नैनो डीएपी के उपयोग को अपनाने की अपील की है। विभाग का कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीक पर आधारित इन नैनो उर्वरकों के प्रयोग से उत्पादन लागत कम होने के साथ फसल की गुणवत्ता और उत्पादकता में भी वृद्धि होती है।
कृषि विभाग के अनुसार धान की फसल में नैनो डीएपी का पहला छिड़काव रोपाई के 25 से 30 दिन बाद तथा दूसरा छिड़काव 10 से 15 दिन के अंतराल पर किया जा सकता है। वहीं नैनो यूरिया का पहला छिड़काव रोपाई के 30 से 35 दिन बाद और दूसरा छिड़काव बालियां निकलने से पहले करना लाभकारी माना गया है। प्रति एकड़ 250 मिलीलीटर नैनो उर्वरक को लगभग 125 लीटर पानी में घोलकर पत्तियों पर समान रूप से छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।
विभागीय अधिकारियों ने बताया कि 500 मिलीलीटर नैनो यूरिया की एक बोतल लगभग 45 किलो पारंपरिक यूरिया के बराबर प्रभाव प्रदान करती है। इसी तरह नैनो डीएपी फसलों में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस की उपलब्धता बढ़ाकर जड़ों के विकास, पौधों की वृद्धि और कल्ले बनने में सहायक होता है।
कृषि विभाग के अनुसार पारंपरिक उर्वरकों का बड़ा हिस्सा बहाव, वाष्पीकरण या भूमि में स्थिरीकरण के कारण नष्ट हो जाता है, जबकि नैनो उर्वरकों की उपयोग दक्षता 80 प्रतिशत से अधिक होती है। इससे पौधों को पोषक तत्व सीधे और प्रभावी रूप से मिलते हैं, जिससे उर्वरक की बचत के साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है।
अधिकारियों ने बताया कि नैनो उर्वरकों के उपयोग से परिवहन और भंडारण लागत में कमी आती है तथा मिट्टी और जल प्रदूषण भी कम होता है। कृषि वैज्ञानिकों ने इसे संतुलित उर्वरक प्रबंधन की दिशा में प्रभावी कदम बताया है।
कृषि विभाग द्वारा विकासखंड और ग्राम स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन आयोजित किए जा रहे हैं। किसानों से आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती को अधिक लाभकारी बनाने तथा नैनो उर्वरकों के संबंध में जानकारी के लिए अपने निकटतम कृषि कार्यालय, कृषि विस्तार अधिकारी या किसान कल्याण केंद्र से संपर्क करने की अपील की गई है।

