किसानों के लिए संघर्ष या डोंगरगढ़ में वर्चस्व की राजनीति – परदेसी सोनबोईर

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किसानों के लिए संघर्ष या डोंगरगढ़ में वर्चस्व की राजनीति – परदेसी सोनबोईर

➡️ धान खरीदी के मुद्दे पर विधायक हर्षिता बघेल से पुराने कार्यकाल की भूमिका स्पष्ट करने की मांग

राजनांदगांव।

तिलाई भाजपा मंडल अध्यक्ष परदेसी सोनबोईर ने धान खरीदी की तारीख को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाजी पर प्रतिक्रिया देते हुए विधायक हर्षिता बघेल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि किसानों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाना जनप्रतिनिधियों का दायित्व है लेकिन इस दायित्व को निभाने में निरंतरता भी जरूरी है। किसानों के हितों की चिंता केवल विपक्ष में रहते हुए ही नहीं, बल्कि सत्ता में रहते हुए भी दिखाई देनी चाहिए।
श्री सोनबोईर ने कहा कि विधायक हर्षिता बघेल वर्तमान में 1 नवंबर से धान खरीदी शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्टर का घेराव कर रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब वर्ष 2018 से 2023 तक छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की सरकार थी तब किसानों की समस्याओं को लेकर उन्होंने अपनी ही सरकार के सामने कितनी बार आवाज उठाई थी। उस समय भी किसान विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे थे और उन्हें अपनी उपज बेचने के लिए कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता था। श्री सोनबोईर ने कहा कि हर्षिता बघेल इसी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य भी रह चुकी हैं। उस दौरान किसानों के सामने गिरदावरी, रकबा कटौती, धान खरीदी के लिए टोकन प्राप्त करने और बारदाने की राशि के भुगतान जैसे मुद्दे चर्चा में रहे। किसानों को इन समस्याओं से राहत दिलाने के लिए जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने सवाल किया कि जब किसान अपनी उपज बेचने के लिए टोकन के इंतजार में परेशान होते थे जब रकबा कटौती को लेकर शिकायतें सामने आती थीं और जब बारदाने की राशि के भुगतान को लेकर किसानों की चिंता बनी रहती थी तब विधायक हर्षिता बघेल ने इन मुद्दों को लेकर अपनी सरकार के सामने क्या कदम उठाए थे। श्री सोनबोईर ने कहा कि इन सवालों का जवाब जनता के सामने आना चाहिए। यदि किसानों के हित सर्वोपरि हैं तो किसानों से जुड़े मुद्दों पर सभी जनप्रतिनिधियों को एक समान मापदंड अपनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसानों की परेशानी किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश की चिंता का विषय है। श्री सोनबोईर ने धान खरीदी की तारीख का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2021-22 में कांग्रेस सरकार के दौरान धान खरीदी 1 दिसंबर से शुरू हुई थी। अब 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने की मांग को लेकर कलेक्टर घेराव किया जा रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि उस समय धान खरीदी की तारीख को लेकर क्या परिस्थितियां थीं और वर्तमान में 1 नवंबर से खरीदी शुरू करने की मांग के पीछे क्या आधार हैं। उन्होंने कहा कि धान खरीदी छत्तीसगढ़ के किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण विषय है। खरीदी की तारीख, टोकन व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और भुगतान जैसे मामलों में किसानों को स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की अनिश्चितता का सामना न करना पड़े। श्री सोनबोईर के अनुसार किसानों की मांगों पर चर्चा करते समय केवल वर्तमान सरकार से सवाल करना पर्याप्त नहीं है। जनप्रतिनिधियों को अपने पूर्ववर्ती कार्यकाल में किए गए प्रयासों और किसानों के हित में उठाए गए कदमों की जानकारी भी सार्वजनिक करनी चाहिए। श्री सोनबोईर ने डोंगरगढ़ क्षेत्र की राजनीतिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में पूर्व विधायक और वर्तमान विधायक के बीच राजनीतिक प्रभाव तथा भविष्य की दावेदारी को लेकर चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे माहौल में किसानों की मांग को लेकर किए जा रहे आंदोलन पर राजनीतिक सवाल उठना भी स्वाभाविक है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट रूप से विधायक से यह बताने की मांग की कि धान खरीदी की तारीख को लेकर किए जा रहे आंदोलन का मुख्य उद्देश्य किसानों की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करना है, तो इसके लिए पहले क्या प्रयास किए गए और आगे क्या ठोस पहल की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों को राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। किसानों को समय पर धान बेचने की सुविधा, पर्याप्त टोकन, बारदाने की उपलब्धता और भुगतान की व्यवस्था मिलना सबसे महत्वपूर्ण है। किसी भी राजनीतिक दल या जनप्रतिनिधि को किसानों की समस्याओं पर सवाल उठाने का अधिकार है, लेकिन उन सवालों के साथ अपने पुराने कार्यकाल का रिकॉर्ड भी सामने रखना चाहिए। श्री सोनबोईर ने कहा कि किसानों की समस्याएं वर्षों से चली आ रही हैं। इसलिए उनकी समस्याओं को लेकर उठने वाली आवाज केवल राजनीतिक परिस्थितियों के अनुसार नहीं बदलनी चाहिए। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी जनप्रतिनिधियों को किसानों के हित में जिम्मेदारी निभानी चाहिए। उन्होंने विधायक हर्षिता बघेल से सवाल किया कि कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में किसानों की समस्याओं को लेकर उन्होंने क्या प्रयास किए थे और वर्तमान में धान खरीदी 1 नवंबर से शुरू कराने के लिए आंदोलन के साथ कौन-सी ठोस पहल की जा रही है। श्री सोनबोईर ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए संवाद, जवाबदेही और व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं। जनता यह जानना चाहती है कि किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने कार्यकाल में क्या भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि किसानों के मुद्दों पर राजनीति से ऊपर उठकर काम होना चाहिए। धान खरीदी की तारीख को लेकर मांग उठाने के साथ-साथ गिरदावरी, रकबा कटौती, टोकन व्यवस्था और भुगतान जैसी समस्याओं के समाधान पर भी स्पष्ट कार्ययोजना सामने आनी चाहिए, ताकि किसानों को वास्तविक राहत मिल सके।

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