राजनांदगांव। जिले में रबी वर्ष 2026 के दौरान द्वि-फसलीय क्षेत्र को बढ़ावा देने, वैकल्पिक फसलों की खेती को प्रोत्साहित करने और फसल विविधीकरण के जरिए किसानों की आय में इजाफा करने के उद्देश्य से जिला प्रशासन एवं कृषि विभाग की ओर से एक विशेष तकनीकी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में कृषि के साथ-साथ उद्यानिकी, मत्स्य पालन, पशुपालन, सहकारिता विभाग और कई निजी कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों और मैदानी अधिकारियों ने शिरकत की।
कार्यशाला का मुख्य फोकस कम लागत में अधिक उत्पादन, उपलब्ध सिंचाई जल का समुचित उपयोग और फसल चक्र में बदलाव लाकर किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना रहा।
अनुबंध खेती से मक्का उत्पादन को मिलेगा बढ़ावा
कार्यक्रम के दौरान गॉरमेट पॉपकॉर्न कंपनी के प्रतिनिधि दयाजी ने पॉपकॉर्न मक्का की अनुबंध खेती (कॉट्रैक्ट फार्मिंग) को बढ़ावा देने की जानकारी दी। उन्होंने किसानों के साथ अनुबंध, उपज की तय प्रक्रिया के तहत खरीदी और समय पर भुगतान की व्यवस्था समझाई। वहीं, एबीस ग्रुप के शिवेंद्र दुबे ने अनुदान पर मक्का बीज उपलब्ध कराने और उत्पादित मक्का की खरीदी की व्यवस्था साझा की। इस पहल का मकसद किसानों को धान के अलावा अन्य वैकल्पिक फसलों की ओर आकर्षित करना और उनकी उपज को सीधा बाजार से जोड़ना है।
अधिकारियों ने दी तकनीकी जानकारियां
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दुर्गा प्रसाद अधिकारी ने किसानों को पारंपरिक तौर-तरीकों से हटकर नवाचार अपनाने और संसाधनों का बेहतर उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। उप संचालक कृषि टीकम सिंह ठाकुर ने पिछले साल के अनुभवों को साझा करते हुए मैदानी अधिकारियों को क्षेत्रवार कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि फसल चयन में जल की उपलब्धता और भूमि की प्रकृति का खास ध्यान रखा जाना चाहिए।
कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र की डॉ. नूतन रामटेके और मां बम्लेश्वरी स्व-सहायता समूह के प्रतिनिधि देवांगन ने भी विचार रखे। इस कार्यशाला में किसान मित्रों के साथ संवाद सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें उनकी समस्याओं और सुझावों के आधार पर आगामी कार्ययोजना तैयार करने पर सहमति बनी।





