91.85 लाख की अंतर्राज्यीय साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट धारक दो और आरोपी गिरफ्तार, भेजे गए जेल

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राजनांदगांव। साइबर ठगी की अवैध कमाई को ठिकाने लगाने के लिए म्यूल (भाड़े के) बैंक खातों का इस्तेमाल करने वाले गिरोह पर राजनांदगांव पुलिस ने शिकंजा कसा है। थाना सिटी कोतवाली और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने 6 राज्यों में करीब 91 लाख 85 हजार रुपये की ठगी में प्रयुक्त म्यूल अकाउंट धारक दो और आरोपियों को गिरफ्तार कर रविवार को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया। प्रकरण में एक आरोपी को पुलिस एक दिन पहले ही जेल भेज चुकी है।

पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देशन, एएसपी कीर्तन राठौर व सीएसपी सत्यप्रकाश तिवारी के मार्गदर्शन में साइबर अपराधों और म्यूल अकाउंट्स पर अंकुश लगाने विशेष अभियान चलाया जा रहा है।

आईसीआईसीआई बैंक खातों से हुआ 91.85 लाख का लेनदेन
गृह मंत्रालय के भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने ऐसे संदिग्ध बैंक खातों की जांच शुरू की थी। जांच में खुलासा हुआ कि आईसीआईसीआई बैंक के खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की 91,85,000 रुपये की अवैध रकम को ठिकाने लगाने और ट्रांसफर करने में किया गया। खाताधारक यह जानते हुए भी कि रकम ठगी की है, कमीशन के लालच में इसका इस्तेमाल कर रहे थे।

इस मामले में कोतवाली पुलिस ने बीएनएस की धारा 317(4), 317(5) और 3(5) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर 3 अक्टूबर को ग्राम जामरी निवासी आरोपी धनीराम सिन्हा (43) को गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

पूछताछ में कबूला जुर्म, दुर्ग व धमतरी से हुई गिरफ्तारी
विवेचना के दौरान पुलिस ने दबिश देकर दो अन्य आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में जुर्म स्वीकार करने पर पुलिस ने रविवार (4 अक्टूबर) को दोनों आरोपियों—जितेन्द्र पाण्डेय (34 वर्ष, निवासी दया नगर रिसाली, दुर्ग) और हिमांशु निर्मलकर (22 वर्ष, निवासी संजय नगर, कुरूद, जिला धमतरी) को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।

सराहनीय भूमिका
इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक उपेन्द्र कुमार शाह, साइबर सेल प्रभारी निरीक्षक विनय पम्मार, प्रशिक्षु उप-निरीक्षक नितेश कुमार कर्ष, प्रधान आरक्षक जी. सिरिल कुमार, अखिल अम्बादे, आरक्षक सेहल साहू व विकास केशरवानी की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

क्या होता है म्यूल अकाउंट और कैसे बचें?
म्यूल अकाउंट: यह ऐसा बैंक खाता होता है जिसका उपयोग साइबर अपराधी ठगी की रकम को छिपाने, निकालने या ट्रांसफर करने के लिए करते हैं। अपराधी अक्सर कमीशन का लालच देकर या धोखे से लोगों के बैंक खाते, एटीएम और चेकबुक हासिल कर लेते हैं।

पुलिस की चेतावनी: राजनांदगांव पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या सिम कार्ड न दें। खाता किराये पर देना, बेचना या कमीशन पर उपलब्ध कराना कानूनन अपराध है। ऐसे कृत्य में शामिल पाए जाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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