कम पानी में ज्यादा मुनाफा : धान छोड़ उद्यानिकी फसलों की ओर बढ़े किसान तामेश्वर साहू

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राजनांदगांव। अल्प वर्षा और जल संरक्षण की आवश्यकता के बीच जिले के ग्राम जंगलेसर के किसान तामेश्वर लाल साहू ने धान की पारंपरिक खेती छोड़कर उद्यानिकी फसलों को अपनाते हुए फसल विविधीकरण की मिसाल पेश की है। कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आमदनी मिलने से वे अब अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन गए हैं।

करीब तीन एकड़ भूमि के मालिक तामेश्वर साहू ने बताया कि पहले वे खरीफ सीजन में धान की खेती करते थे, जिससे प्रति एकड़ लगभग 15 हजार रुपए का लाभ होता था। बदलते मौसम और पानी की कमी को देखते हुए उन्होंने धान की जगह सब्जी एवं अन्य उद्यानिकी फसलों की खेती शुरू की। पिछले वर्ष आधा एकड़ में बैंगन की खेती से उन्हें करीब साढ़े तीन लाख रुपए का लाभ हुआ। बेहतर मुनाफे से उत्साहित होकर इस वर्ष उन्होंने उद्यानिकी फसलों का रकबा और बढ़ा दिया है।

उन्होंने बताया कि धान की तुलना में सब्जियों और अन्य वैकल्पिक फसलों में पानी की जरूरत कम होती है। इससे जल संरक्षण के साथ मिट्टी की उर्वरता भी बनी रहती है। लगातार धान की खेती से भूमि कठोर होती है, जबकि उद्यानिकी फसलों से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर रहती है और उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होती है।

तामेश्वर साहू ने किसानों से मौसम और जल उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए धान के साथ मक्का, मूंग, दलहन, तिलहन और उद्यानिकी फसलों की खेती अपनाने की अपील की। उनका कहना है कि इससे कम पानी में अधिक उत्पादन और बेहतर आय हासिल की जा सकती है।

उन्होंने बताया कि राज्य शासन द्वारा धान के स्थान पर अन्य फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है। इस योजना से किसानों में फसल विविधीकरण के प्रति रुचि बढ़ी है। उन्होंने इस पहल के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया।

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