मुहर्रम में शेर बनने, बाजा-धुमाल और हथियार प्रदर्शन पर रोक की मांग, मुस्लिम समाज ने सौंपा ज्ञापन

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राजनांदगांव। मुहर्रम पर्व के दौरान शेर बनने की परंपरा, बाजा-धुमाल, हथियारों के प्रदर्शन तथा कानून व्यवस्था को प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर जामा मस्जिद कमेटी और जुल्फिकार-ए-हैदरी कमेटी ने छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज को ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन की प्रति पुलिस अधीक्षक को भी भेजी गई है।
जामा मस्जिद के सदर रईस अहमद शकील एवं जुल्फिकार-ए-हैदरी कमेटी के अध्यक्ष ताहिर जोया ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि राजनांदगांव में मुहर्रम के दौरान कुछ लोग शेर का रूप धारण कर बाजा-धुमाल के साथ धार्मिक स्थलों और मजारों में प्रवेश करते हैं। इससे धार्मिक मर्यादाएं प्रभावित होती हैं और कई बार शहर की यातायात व्यवस्था भी बाधित होती है।
ज्ञापन में कहा गया है कि कुछ असामाजिक तत्व इन गतिविधियों की आड़ में माहौल खराब करने का प्रयास करते हैं, जिससे आमजन को असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसे देखते हुए मुहर्रम के दौरान शेर बनने, बाजा-धुमाल, हथियारों के प्रदर्शन तथा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की गई है।
इस संबंध में पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने भी अपनी बात रखी। इस दौरान रईस अहमद शकील, हाजी रशीद भाई, इब्राहिम मोहम्मद (मुन्ना), हसन भाई एडवोकेट, सैय्यद अफजल अली, फिरोज सौदागर, ताहिर जोया, ओवैस सोलंकी, मोहम्मद अमन, मोहम्मद सकलेन, अनस गौरी, ओवैस मेमन और मकसूद आलम सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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